पश्चिमोत्तर भारत में सकों की अआधिपत्य के पश्चात पार्थीयाई लोग का अआधिपत्य स्थापित हुआ। भारतीय लोगों का मूल निवास इरान था भारतीय साहित्य में इन्हें पल्लव या पहलव कहा गया था।
पल्लव वंश का सर्वाधिक प्रसिद्ध शासक गोंडोफर्निस था इस पल्लव शासक की राजधानी तक्षशिला थी ।गोंदोफर्निस के शासनकाल में सेंट थॉमस ईसाई धर्म का प्रचार करने के लिए भारत आए थे पल्लव शक्ति का वास्तविक संस्थापक मिथेड्रेस प्रथम था।
भारत में कुषाण राज्य
पल्लवों के पश्चात कुषाण का प्रथम भारत में आगमन हुआ अधिकांश विद्वान को कुषाणों का संबंध पश्चिमी चीन में गोबी प्रदेश में रहने वाली यूं ची जाति आप से मानते हैं।
कुजुल कडफिसेस भारतभारत में कुषाण वंश का का संस्थापक था। इसके बाद बाद राजा बने बिम कडिफिसेस ने भारी मात्रा में स्वर्ण सिक्के जारी किए जिनकी शुद्धता गुप्तकालीन स्वर्ण सिक्कों से उत्कृष्ट थी। इन सिक्कों पर शिव नदी और त्रिशूल की आकृति बनी है जिससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यह शैव था।