गांधार कला एवं मथुरा कला में अंतर

गांधार कला

        गहरी नीली एवं काले पत्थर का प्रयोग है संरक्षक शक एवं कुषाण और यथार्थवादी तथा मुख्यतः बुद्ध की मूर्तियां।

मथुरा कला

           इसमें लाल पत्थर का प्रयोग हुआ है संरक्षक कुषाण है आदर्शवादी है बौद्ध जैन तथा ब्राह्मण धर्म से संबंधित मूर्तियां भी है।

गांधार कला के अंतर्गत बुद्ध की धार्मिक तथा धर्म चक्र मुद्रा ध्यान मुद्रा अभय मुद्रा तथा वरद मुद्रा की आदि मूर्तियां का निर्माण किया गया है मथुरा कला में के अंतर्गत बुद्ध धर्म चक्र प्रवर्तन मुद्रा अभय मुद्रा ध्यान मुद्रा भू स्पर्श मुद्रा आज मूर्तियों का निर्माण किया गया है।

मथुरा के कनिष्क की एक सिर विहीन खड़ी प्रतिमा मिली है जिसमें उन्हें घुटने तक चोगा तथा पैरों में भारी जूते पहने हुए दिखाया गया है।

वर्तमान मथुरा संग्रहालय में कुषाण कालीन मूर्तियों का भारत का सबसे अधिक संग्रह है यह ध्यान देने  योग्य बातें हैं।

कनिष्क के उत्तराधिकारी हुविष्क ने 106- 138ईबी के समय में कुछ और सत्ता का प्रमुख केंद्र पेशावर में से हटकर मथुरा पहुंच गया था।

कनिष्क के कुल का अंतिम महान शासक वासुदेव था एक यूनानी राजदूत हेलिओडोरस ने वासुदेव के सम्मान में एक स्तंभ विदिशा के निकट स्थापित करवाया था। कुषाण काल में पक्की ईंटों का प्रयोग आरंभ हुआ था प्रसिद्ध पुस्तक कामसूत्र में रचना वात्सायन द्वारा निर्धारित होती है कि इसी समय की गई थी यह रती शास्त्रीय कामशास्त्र की प्राचीनतम पुस्तक है जिसमें रतिया प्रीति का विवेचन किया गया है इसमें एक नागरिक या नगरजीबी पुरुष का जीवन चरित्र किया गया है। जो शहरों जीवन के विकास काल की झांकी प्रस्तुत करता है।

Posted on by