कुषाण काल में बाल विवाह की प्रथा प्रारंभ हुई थी स्त्रियों के उपनयन की समाप्ति तथा बाल विवाह के प्रचलन में इन्हें समाज से अत्यंत निम्न स्थिति में ला दिया इस युग में विवाह की आयु और कम कर के आठ से लेकर 10 वर्ष की आयु की कन्या के विवाह के लिए उपयुक्त माना गया कनिष्क के दरबार में संरक्षण प्राप्त विद्वान जैसे अश्वघोष चतुर्थ बौद्ध संगीत का उपाध्यक्ष था वह उच्च कोटि का साहित्यकार भी था इसकी तुलना मिल्टन गेटवे, काण्ट तथा वॉल्टियर से की जाती है। अश्वघोष ने बुद्ध की जीवनी बुद्ध चरित के नाम से लिखी बुद्धचरित को बौद्धों का रामायण कहते हैं किसने सौन्दरनंद नामक काव्य की रचना की।
अश्वघोष को संस्कृत का प्रथम नाटककार माना जाता है। जबकि सर्वप्रथम संपूर्ण नाटक रचना का श्रेय गुप्तकालीन भास को दिया गया है जिन्होंने स्वप्नवासवदत्ता रचा।
नागार्जुन - इसकी तुलना मार्टिन लूथर से की जाती है । वह दार्शनिक व वैज्ञानिक था। उसने अपने ग्रंथ माध्यमिक सूत्र में सापेक्षता के सिद्धांत का प्रतिपादन किया है अतः उसे भारती आइंस्टीन भी कहा जाता है चीनी मान्यता के अनुसार नागार्जुन ने प्रथम शताब्दी ईस्वी में चीन की यात्रा कर वहां बौद्ध शिक्षा प्रदान की थी।