स्विट्जरलैंड का एक शहर है बेसल जो की ब्यूरो ऑफ इंटरनेशनल सेटेलमेंट का मुख्यालय है। ब्यूरो ऑफ इंटरनेशनल सेटेलमेंट का लक्ष्य है "आर्थिक स्थिरता तथा बैंकिंग विनियमनो का एक समान मानक"। भारत ने बैंकिंग प्रणाली के लिए बेसल समझौतों को स्वीकार किया है ।
बेसल 1-
- इसके तहत समूचा ध्यान ऋण जोखिमो पर दिया जाता है ।
- इसकी शुरुआत 1988 में की गई तथा भारत द्वारा 1999 में अपनाया गया।
बेसल 2-
- वर्ष 2004 से इसके दिशा निर्देशों को प्रकाशित किया गया। यह दिशा निर्देश के तीन मापदंड इस प्रकार हैं-
- बैंक जोखिम परिसंपत्तियों का 9% पूंजी पर्याप्तता अनुपात के न्यूनतम के रूप में बनाए रखेंगे ।
- बैंकों द्वारा बेहतर जोखिम प्रबंधन तकनीक का विकास
- बैंकों को जोखिम विवरणों को केंद्रीय बैंक के सामने रखना आवश्यक
बेसल 3-
- यह दिशानिर्देश 2010 से लागू किए गए।
- इसके अंतर्गत महत्वपूर्ण बैंकिंग मापदंडों जैसे पूंजी , लाभ कमाने , तरलता एवं निधियन पर ज्यादा ध्यान देना तथा बैंकिंग प्रणाली अधिक लोचदार बनाना शामिल है।
- आरबीआई ने 2014 में भारतीय बैंकों में बेसल 3 मानकों की समय सीमा को बढ़ाकर 31 मार्च 2019 कर दिया है ।
- इसके तहत बैंकों को अपना पूंजी पर्याप्त अनुपात 11.5% करना होगा जोकि बेसल 2 के मानक के तहत 9% है । आरबीआई के अनुसार सभी बैंकों द्वारा इसे प्राप्त कर लिया गया है।