वाक्य को सुव्यवस्थित और संयत रूप देने को व्याकरण में पदक्रम कहते हैं। निर्दोष वाक्य लिखने के कुछ नियम है। इनकी सहायता से शुद्ध वाक्य लिखने का प्रयास किया जा सकता है। सुन्दर वाक्यों की रचना के लिए, क्रम,अन्वय और प्रयोग से सम्बन्ध कुछ सामान्य नियमों का ज्ञान आवश्यक है।
क्रम :-
किसी वाक्य के सार्थक शब्दों को यथास्थान रखने की क्रिया को क्रम अथवा पदक्रम कहते हैं। इसके कुछ सामान्य नियम इस प्रकार हैं।
- हिंदी वाक्य के आरम्भ में कर्त्ता , मध्य में क्रम और अंत में क्रिया होनी चाहिए। जैसे – मोहन ने भोजन किया। यहाँ कर्त्ता मोहन ,कर्म भोजन और अंत में क्रिया है
- उदेश्य या कर्त्ता के विस्तार को कर्त्ता के पहले और विधेय या क्रिया के विस्तार को विधेय के पहले रखना चाहिए। जैसे – अच्छे लड़के धीर – धीरे पढ़ते हैं।
- कर्त्ता और कर्म के बीच अधिकरण, अपादान, सम्प्रदान और करण कारक क्रमशः आते हैं। जैसे – मुरारी ने घर में (अधिकरण) आलमारी से (अपादान) श्याम के लिए (सम्प्रदान) हाथ से (करण) पुस्तक निकाली।
- सम्बोधन आरम्भ में आता है। जैसे – हे प्रभु, मुझपर दया करें।
- विशेषण विशेष्य या संज्ञा के पहले आता है। जैसे- मेरी उजली कमीज कहीं खो गयी।
- क्रिया विशेषण क्रिया के पहले आता है। जैसे – वह तेज दौड़ता है।
- प्रश्न वाचक पद या शब्द उसी संज्ञा के पहले रखा जाता हैं, जिसके बारे में कुछ पूछा जाये। जैसे – क्या मोहन सो रहा है ? अन्वय :-
कर्ता और क्रिया का मेल : –
- यदि कर्तृवाच्य वाक्य में कर्त्ता विभक्त्तिरहित है, तो उसकी क्रिया के लिंग, वचन और पुरुष कर्त्ता के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार होंगे। जैसे – करीम किताब पढता है। सोहन मिठाई खता है। रीता घर जाती है।
- यदि वाक्य में एक ही लिंग , वचन और पुरुष के अनेक विभक्त्तिरहित कर्त्ता हों और अंतिम कर्त्ता के पहले और संयोजक आया हो, तो इन कर्त्ताओं की क्रिया उसी लिंग के बहुवचन में होगी। जैसे – मोहन और सोहन सोते हैं। आशा, उषा और पूर्णिमा स्कूल जाती हैं।
- यदि वाक्य में दो भिन्न लिंगों के कर्त्ता हों और दोनों दवंदसमास के अनुसार प्रयुक्त हों, तो उनकी क्रिया पुलिंग बहुवचन में होगी जैसे – नर- नारी गए। राजा – रानी आये। स्त्री – पुरुष मिले । माता- पिता बैठे हैं।
- यदि वाक्य में दो भिन्न विभक्तिरहित एकवचन कर्त्ता हों और दोनों के बीच और संयोजक आये, तो उनकी क्रिया पुलिंग और बहुवचन में होगी राधा और कृषण रास रचते हैं। बाघ और बकरी एक घाट पानी पिटे हैं।
- यदि वाक्य में दोनों लिंगो और वचनों के अनेक कर्त्ता हों, तो क्रिया बहुवचन में होगी और उनका लिंग अंतिम कर्त्ता के अनुसार होगा जैसे – एक लड़का , दो भूढे और अनेक लड़कियां जाती हैं। एक बकरी, दो गायें और बहुत- से बैल मैदान में चरते हैं।
- यदि वाक्य में अनेक कर्त्ताओं के बीच विभाजक समुच्चयबोधक अव्यय या अथवा व रहे , क्रिया अंतिम कर्त्ता के लिंग और वचन के अनुसार होगी। जैसे – घनश्याम की पांच दरिया व एक कंबल बिकेगा। हरी का एक कंबल या पांच दरिया बिकेंगी। मोहन का बैल या सोहन की गायें बिकेंगी।
- यदि उत्तमपुरुष, मध्यपुरुष और अन्यपुरुष एक वाक्य में कर्त्ता बनकर आएं तो क्रिया उत्तमपुरुष के अनुसार होगी। जैसे – वह और हम जायेंगे। हरी, तुम और हम सिनेमा देखने चलेंगे। वह, आप और मैं चलूँगा।
कर्म और क्रिया का मेल :-
- यदि वाक्य में कर्त्ता ने विभक्ति से युक्त हो और कर्म की ‘को’ विभक्ति न हो, तो उसकी क्रिया कर्म के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार होगी। जैसे – आशा ने पुस्तक पढ़ी। हमने लड़ाई जीती। उसने गाली दी। मैंने रूपये दिए। तुमने क्षमा मांगी।
- यदि कर्त्ता और कर्म दोनों विभक्तिचिन्हों से युक्त हो, तो क्रिया सदा एकवचन पुलिंग और अन्यपुरुष में होगी । जैसे – मैंने कृषण को बुलाया। तुमने उसे देखा। स्त्रियों ने पुरुषों को ध्यान से देखा ।
- यदि कर्त्ता को प्रत्यय से युक्त हो और कर्म के स्थान पर कोई क्रियार्थक संज्ञा आये तो क्रिया सदा पुलिंग , एकवचन और अन्यपुरुष में होगी। जैसे – तुम्हे पुस्तक पढ़ना नहीं आता। अलका को रसोई बनाना नहीं आता। उसे समझकर बात करना नहीं आता।
- यदि एक ही लिंग- वचन के अनेक प्राणनिवाचक विभक्तिरहित कर्म एक साथ आएं, तो क्रिया उसी लिंग में बहुवचन होगी। जैसे – श्याम ने बैल और घोड़ा मोल लिए। तुमने गाय और भैंस मोल ली।
- यदि एक ही लिंग- वचन के अनेक प्राणनिवाचक – अप्राणनिवाचक अप्रत्यय कर्म एक साथ एकवचन में आये, तो क्रिया भी एकवचन में होगी। जैसे – मैंने एक गाये और एक भैंस खरीदी। सोहन ने एक पुस्तक और एक कलम खरीदी। मोहन ने एक घोड़ा और एक हाथी बेचा।
- यदि वाक्य में भिन्न -भिन्न लिंग के अनेक प्रत्यय कर्म आएं और वे और से जुड़े हों, तो क्रिया अंतिम कर्म के लिंग और वचन में होगी।
संज्ञा और सर्वनाम का मेल :-
- वाक्य में लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार सवर्नाम उस संज्ञा का अनुसरण करता है। जिसके बदले उसका प्रयोग होता है। जैसे – लड़के वे ही हैं। लड़कियां भी ये ही हैं।
- यदि वाक्य में अनेक संज्ञाओं के स्थान पर ही सर्वनाम आये , तो वह पुलिंग बहुवचन में होगा। जैसे – रमेश और सुरेश पटना गए हैं, दो दिन बाद वे लौटेंगे। सुरेश, शीला और रमा आये और वे चले भी गए।