साम्राज्यवाद का अर्थ साधारणत: बोलचाल की भाषा में साम्राज्यवाद से विशाल भूखण्ड में फैले हुए राज्यों का बोध होता है। राजनैतिक वैज्ञानिकों द्वारा इस के दो अर्थ बताए गए हैं - "शुद्ध भौतिक लाभ के लिए कमजोर जातियों का आर्थिक शोषण के प्रति प्रगतिशील राज्यों का कर्तव्य", परंतु इन दोनों विचारधाराओं में अतिवादी ता देखने को मिलती है, कोई साम्राज्य शोषण कि निश्चित योजना के अनुसार आगे नहीं बढ़ता है और ना ही किसी साम्राज्यवादी राज्य द्वारा पिछड़े हुए लोगों की उन्नति के लिए साम्राज्य की स्थापना की जाती है। आधुनिक युग में साम्राज्यवाद ही सटीक भरी भाषा देना काफी मुश्किल कार्य है, क्योंकि साम्राज्यवाद के विभिन्न रूप धारण कर लिया है, सी डी बंश का कथन है कि, "साम्राज्यवाद अनेक मित्र देशों की जातियों की विधि और शासन की एक पद्धति को प्रकट करने वाला नाममात्र है जो अंतरराष्ट्रीयता के लक्ष्य का केंद्र बिंदु है और जिसके द्वारा प्रांतीय राष्ट्रीयता का प्रतिकार होता है। "प्रो. सुमन का कहना है कि, "चाहे कितने बहाने किए जाएं और नैतिकता का चाहे जितना ढिंढोरा पीटा जाए, यथार्थता यह है कि आधीन देशों पर शक्ति और हिंसा के बल पर विदेशी राज्य स्थापित रखना ही साम्राज्यवाद है। "
एक अन्य परिभाषा है कि, "साम्राज्यवाद उस नीति का नाम है जिसका उद्देश्य साम्राज्य का निर्माण करना, उसका संगठन करना तथा संरक्षण करना होता है अर्थात् एक विशाल आकार का राज्य जो अनेक न्यूनाधिक स्पष्ट राष्ट्रीय इकाइयों को मिलाकर बना है और केंद्रीयकृत इच्छा के अधीन हो"।