भारत चीन सीमा विवाद क्या है ? इसके बारे में कुछ विस्तृत जानकारी प्राप्त करेंगे।

भारत- चीन सीमा विवाद:-

भारत और चीन के बीच लगभग 2000 मील लंबी सीमा है।‌‌ सीमा रेखा को समझौतों व प्रशासकीय व्यवस्थाओं से नियमित किया गया था। इसके अतिरिक्त भारत-चीन प्राकृतिक सीमा रेखा भी स्पष्ट है, कि दोनों देशों की वास्तविक सीमाओं के विषय में कोई विवाद नहीं था।

मैकमोहन रेखा:-

यह रेखा उत्तर-पूर्व में भारत और चीन सीमा का विभाजन करती है। यह भूटान के पूर्व में दोनों देशों की सीमा रेखा है। भारत ने सदैव ही इस एक रेखा को वैध रूप से निर्धारित सीमा रेखा माना है, परंतु चीन ने हमेशा इसे साम्राज्यवादी रेखा कहकर निंदा की है।

1914 ईस्वी को शिमला में हुए ब्रिटिश, भारत, चीन और तिब्बत के प्रतिनिधियों के एक सम्मेलन में सीमा रेखा निर्धारित करके औपचारिक रूप से सीमा विभाजन किया गया था। शिमला सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व ब्रिटिश मंत्रिमंडल के आर्थर - हेनरी मैक मोहन ने किया था। मैक मोहन ने मानचित्र पर लाल पेंसिल से एक रेखा खींच कर सीमा विभाजन किया यह एक प्रकार से प्राकृतिक सीमा भी है।

लद्दाख:-

लद्दाख हमेशा से जम्मू कश्मीर राज्य का अंग रहा है और आज भी है। इस क्षेत्र में लद्दाख -चीन सीमा किसी संधि के द्वारा निर्धारित नहीं हुई थी। परंतु शताब्दियों से भारत और चीन दोनों इस क्षेत्र के सीमा रेखा को मानते रहे थे।

भारत द्वारा 1899 ईसवी को चीन को भेजे गए एक पत्र में यह स्पष्ट कर दिया गया था। अक्साईचीन भारतीय प्रदेश का भाग था।
जम्मू कश्मीर राज्य के राजस्व अभिलेखों में भी अक्साईचिन को कश्मीर के लद्दाख प्रांत का भाग स्वीकार किया गया था।

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