गुप्त वंश

कुषाण साम्राज्य के खंडहर पर एक नए साम्राज्य का प्रादुर्भाव हुआ जिसने अपना अधिपत्य कुशाल और सातवाहन दोनों के पिछले राज्य क्षेत्रों से बहुत बड़े भाग पर स्थापित किया था गुप्त साम्राज्य गुप्त मूल्यतः वैवर्त  रहे होंगे या सम्राज्य इतना विशाल तो नहीं था जितना मौर्य सम्राज्य फिर भी इतने सारे उत्तर भारत को एक सदी के ऊपर राजनीतिक एकता के सूत्र में बांधे रखा।

चंद्रगुप्त मौर्य प्रथम

        गुप्त अभिलेखों से ज्ञात होता है कि चंद्रगुप्त प्रथम ही गुप्त वंश का प्रथम स्वतंत्र शासक था जिसने महाराजाधीराज की उपाधि प्राप्त कर उसकी उपाधि धारण की थी चंद्र गुप्त वंश के द्वितीय शासक घटोत्कच का पुत्र था गुप्त वंश के प्रथम शासक का नाम श्री गुप्त था चंद्रगुप्त मौर्य ने गुप्त संवत की स्थापना की थी या 319 से 320 ईसवी में हुआ था या अपने राज्यारोहण के स्मारक के रूप में की जाती थी चंद्रगुप्त प्रथम ने लक्ष्मी राजकुमारी कुमार देवी के साथ विवाह किया था अपने सिक्के पर कुमार देवी का नाम भी खुलवाया था इस समयइस समय लक्ष्यों के दो राज्य थे वैशाली कि राज्य तथा नेपाल की राज्य। कुमार देवी का विवाह करके चंद्रगुप्त प्रथम ने वैशाली का राज्य प्राप्त कर लिया था।

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