गुरु अमरदास 73 वर्ष की अवस्था में गुरु अंगद के उत्तराधिकारी के रूप में नियुक्त हुए। अमर दास का जन्म 1480 में अमृतसर के निकट हुआ था। ये जाती के खत्री थे और वैष्णव धर्म के पक्के अनुयायी थे। अकबर जैसे मुगल शासक भी एक बार उनके दर्शन के लिए अमृतसर गए । अमरदास की महत्वपूर्ण सेवायें व उपकार निम्नलिखित हैं :-
- एकल विवाह, विधवा विवाह तथा अंतर्जातीय विवाह को प्रोत्साहन देना।
- सती व पर्दा प्रथा पर रोक।
- अमरदास ने धीरे धीरे सिक्ख धर्म को हिंदू धर्म से पृथक एक स्वतंत्र धर्म के रूप में स्थापित करने की कोशिश की।
- अमर दास ने सिक्खों में हिन्दू रीति रिवाज से अलग हटकर विवाह करने की व्यवस्था का आरम्भ किया , जिसे लवन कहा गया।
- इन्होंने पानी की एक बावड़ी (कुआँ) का निर्माण कराया जिसका पानी सभी बीमारियों को दूर कर देता था।
- इन्होंने लंगर व्यवस्था में परिवर्तन किया और कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को लंगर में भोजन करना आवश्यक है।
- अकबर ने इनके आश्रम में जाकर लंगर खर्च के लिए कुछ गांव देना चाहा, लेकिन गुरु ने मना कर दिया। तो फिर अकबर ने गुरु की पुत्री बिविभाली के नाम से कई गांव प्रदान कर दिए।