1. मूल अधिकारों में अनुच्छेद 368 के द्वारा ही संशोधन होगा जबकि वैधानिक अधिकारों में सामान्य प्रक्रिया के द्वारा संशोधन किया जाएगा विशेष बहुमत की कोई आवश्यकता नहीं होगी।
2. मूल अधिकारों का उल्लेख भाग 3 में ही होगा जबकि वैधानिक अधिकारों का उल्लेख भाग 3 को छोड़कर संविधान के अन्य भागों में होगा तथा संविधान के अलावा भी इसका उल्लेख होगा जैसे सूचना का अधिकार
3. मूल अधिकार व्यवस्थापिका और कार्यपालिका दोनों के विरुद्ध है जबकि वैधानिक अधिकार केवल कार्यपालिका के विरुद्ध है यह व्यवस्थापिका की शक्ति को मर्यादित नहीं करती है।
4. मूल अधिकारों का उल्लंघन होने पर सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय दोनों के द्वारा उपचार प्रदान किया जाएगा जबकि वैधानिक कानूनों के उल्लंघन होने पर केवल उच्च न्यायालय के द्वारा ही प्रलेख जारी किया जाएगा सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा नहीं।
नोट- सूचना का अधिकार संविधान में उल्लेख नहीं है इसलिए यह वैधानिक अधिकार है।