भारतीय संविधान के अनुच्छेद 17 के अंतर्गत अस्पृश्यता का अंत में आज हम आपको बताएंगे कि यदि एससी-एसटी व्यक्ति को आप परेशान करते हैं तो किस प्रकार की सजा का प्रावधान है?

अनुच्छेद 17 की व्याख्या:-

एससी एसटी के किसी सदस्य को अखाद्य पदार्थ जो खाने योग्य न हो, अपेय पदार्थ जो पीने योग्य ना हो उस व्यक्ति को बाध्य करता है।

यदि एससी एसटी के किसी घर के इर्द-गिर्द जानबूझकर कूड़ा करकट या मल मूत्र इकट्ठा करें।

कपड़ा फाड़ दे या चेहरे पर कालिख पोत दे।

सार्वजनिक तालाब हैंडपंप ,जहां से वह पीने का पानी इस्तेमाल करता हो, उस स्थान को कोई गैर sc-st व्यक्ति गंदा करें ,वह भी जानबूझकर ।

यदि कोई sc-st महिला के इच्छा के विरुद्ध कोई व्यक्ति यौन शोषण करें या शारीरिक संबंध स्थापित करें।

जमीन पर कब्जा कर ले ,जमीन पर खेती न करने दें , या खेती ही ले ले ।

वर्ष 2015 में इन कानूनों में संशोधन किया गया जो इस प्रकार है- 

यदि किसी sc-st व्यक्ति के कोई उत्तराधिकारी ना हो

या वह कोई ऐसी बीमारी से ग्रसित हो जो ठीक होने योग्य ना हो और उसे तत्काल पैसों की जरूरत हो तो उसे बेंच सकता है।

यदि वह पलायन अर्थात उस निवास स्थान को छोड़कर चला जाए तो कोई भी व्यक्ति उस जमीन को ले सकता है।

यदि कोई व्यक्ति एससी-एसटी के व्यक्ति को किसी पक्ष विशेष व्यक्ति को वोट देने के लिए बाध्य करें।

किसी लोकसेवक से उसकी शक्ति का उपयोग जानबूझकर sc-st व्यक्ति के ऊपर करना । उद्देश्य- परेशान करने के लिए हो।

जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने पर ।

किसी भी एससी एसटी के किसी व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपमानित करें या उसे अपना गांव या परिवार /निवास स्थान से वंचित कर दे । तो- 

सजा का प्रावधान:-

जब कोई व्यक्ति (गैर sc-st) किसी एससी-एसटी के संपत्ति को नुकसान पहुंचाए तब। उसे 6 माह से 7 वर्ष की सजा हो सकती है।

यदि कोई गैर sc-st का व्यक्ति जानबूझकर अपराध करता है तब न्यायालय उसे 6 माह से 20 वर्ष की सजा आईपीसी धारा के अंतर्गत दे सकता है।

यदि कोई गैर sc-st का व्यक्ति जानबूझकर sc-st व्यक्ति के निवास स्थान को अग्नि या विस्फोट से नुकसान पहुंचाता है या करने का प्रयास करता है, तब न्यायालय उसे आजीवन कारावास की सजा सुना सकता है।

मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत करें जिससे न्यायालय का वक्त जाया हो तब न्यायालय उसे मृत्युदंड भी दे सकता है।

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