1. एक देश के निवासियों का विश्व के अन्य देशों के निवासियों के साथ सामान्यतया 1 वर्ष के दौरान, जो व्यापार अर्थात अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवहार या लेनदेन होते हैं उसका लेखन जिस खाते में किया जाता है उसे भुगतान संतुलन विवरण कहा जाता है।या लेखा-जोखा 1 वर्ष से संबंधित होता है, इसलिए यह किसी अर्थव्यवस्था की दीर्घकालीन स्थिति पर प्रकाश नहीं डालता। एक देश के निवासियों तथा अन्य देशों के निवासियों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, संपत्ति तथा पूंजी आदि का जो लेन-देन होता है उसे हम अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवहार कहते हैं।
2.. इस लेनदेन के बाद हम यह जानना चाहते हैं कि एक देश का विश्व के अन्य देशों के साथ क्या देना है या पाना है, मुख्य रूप से इस उद्देश्य से हम जो विवरण तैयार करते हैं उसे भुगतान संतुलन कहते हैं। देश के निवासियों के अंतर्गत हम वैधानिक रूप से व्यापारियों, व्यक्तिगत इकाइयों तथा सरकार को रखते हैं। एक नियम को उस देश का निवासी मानते हैं जिसमें वह समामेलित हुआ है, पर उसकी विदेशों में फैली शाखाएं निकासी नहीं होगी। सैनिक, सरकार के राजनयिक, पर्यटक तथा श्रमिक जो अस्थाई रूप से प्रवास करते हैं उन्हें भी उस देश का निवासी माना जाता है, जिसके वे नागरिक होते हैं।
3. एक देश जो विश्व के अन्य देशों को वस्तुएं भेजता है उसे हम देश का निर्यात कहते हैं तथा दूसरे देशों से जो वस्तुओं का क्रय करता है उसे हम उसका आयात कहते हैं।
4. चूॅकि आयात तथा निर्यात की जाने वाली वस्तुएं पोर्ट पर रिकॉर्ड होती हैं इसलिए आयात तथा निर्यात को हम दृश्य मदें भी कहते हैं।वस्तुओं के अतिरिक्त सेवाओं का भी आदान-प्रदान होता है जिन्हें पोर्ट पर रिकॉर्ड नहीं किया जाता है इसलिए उसे हम अदृश्य मदें कहते हैं ।इसके अतिरिक्त भी अनेक लेनदेन भी होते हैं जैसे पूंजी (निवेश) का अंतर प्रवाह जिन्हें हम भुगतान संतुलन में शामिल करते हैं।