चंद्रगुप्त के पश्चात उसका पुत्र कुमारगुप्त प्रथम गुप्त साम्राज्य का शासक बना कुमारगुप्त की माता का नाम ध्रुव देवी था गुप्त शासकों में सर्वाधिक अभिलेख कुमारगुप्त के ही हैं कुमारगुप्त प्रथम के अभिलेखों मुद्राओं से ज्ञात होता है कि उसके अन्य उपाधि धारण की थी उसने महेंद्र गुप्त, श्री महेंद्र ,श्री महेंद्रसिंह, महेंद्रकर्म, अजीत महेंद्र, और गुप्त कुल व्योम आदि उपाधि धारण की थी उसकी सर्व प्रथम उपाधि महेंद्रादित्य थी।
कुमारगुप्त प्रथम एवं स्वयं वैष्णो धर्म अनुयाई था किंतु उसने धर्म सहिष्णुता की नींद का पालन किया था। कुमारगुप्त ने अधिकाधिक संख्या में मयूर अकृत की रजत मुद्राएं प्रचलित की थी। कुमारगुप्त प्रथम ने शासन काल में नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना की थी।
इसके पहले चंद्रगुप्त मौर्य के शासन काल में नवरत्नों में सर्वोपरि महाकवि कालिदास थे अगले कर्म पर महान चिकित्सक धनवंतरी थे तीसरे गोकुल वैज्ञानिक वराहमिहिर चौथे को शिकारइ डिक्शनरी निर्माता अमर सिंह वास्तुकार शंकु तथा छठवें रत्न फलक ज्योतिषी क्षपणक थे इसी प्रकार सातवें विद्वान वयाकरणज्ञ थे। आठवीं जादूगर वेताल भट्ट तथा नवरत्न घटकर्पर महान कूटनीतिज्ञ थे।