उत्तरी कोयल परियोजना

अगस्त 2017 में केंद्रीय कैबिनेट ने झारखंड और बिहार में उत्तरी कोयल जलाशय परियोजना के बकाया काम को फिर से प्रारंभ करने के लिए 16 से 22 करोड रुपए की मंजूरी दी थी । कैबिनेट ने मंडल बांध के जलस्तर को घटाकर 341 मीटर किए जाने का भी फैसला किया, ताकि कम इलाका बांध के डूब क्षेत्र में आए और बेतला उद्यान और पलामू टाइगर रिजर्व को बचाया जा सके।

सोन नदी की सहायक उत्तरी कोयल नदी पर स्थित यह परियोजना 1972 में शुरू की गई थी । और 45 साल बाद भी आज तक लटकी हुई थी। हालांकि 23 सौ करोड़ की लागत से बनने वाली इस परियोजना पर 700 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं । इस परियोजना के तहत 67.86 मीटर ऊंचे और 343.33 मीटर लंबे कंक्रीट बांध का निर्माण कराया जाना था।

इसकी क्षमता 1160 मिलियन क्यूबिक मीटर जल संग्रह करने की निर्धारित की गई थी इसके अलावा परियोजना के तहत नदी के बहाव की बिजली दिशा में मोहनगंज में 819.6 मीटर लंबा बैराज और बैराज के दाएं और बाएं तरफ से दो नैहरे सिंचाई के लिए वितरण प्रणालियों समेत बनाई जानी थी।

1993 से रुका है काम इसका निर्माण कार्य  1972 में प्रारंभ हुआ और 1993 में बिहार सरकार के वन विभाग ने इसे रुकवा दिया। तब से बांध का निर्माण कार्य ठप पड़ा हुआ।

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