सल्तनत काल की स्थापत्य कला की प्रमुख कृतियों का विवरण निम्नलिखित है -
(1)- दासवंश की स्थापत्य कला --- दासवंश के प्रथम सुल्तान कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली में कुतुबमीनार, कुव्वतुल - उल - इस्लाम मस्जिद और अजमेर में अढ़ाई दिन का झोपड़ा नामक मस्जिद बनवाई ।इल्तुतमिश के शासनकाल में हौज - ए - शम्सी और ईदगाह का निर्माण कराया गया । बलबन का मकबरा भी इसी युग की देन है ।
(2)- खिलजी वंश की स्थापत्य कला --- खिलजी वंश के शासकों में अलाउद्दीन खिलजी का नाम उल्लेखनीय है । उसके शासनकाल में सिरी का किला, अलाई दरवाजा, हजार - सितुन - महल, हौज - ए- इलाही, हौज - ए - खास आदि का निर्माण किया गया था ।
(3)- तुगलक वंश की स्थापत्य कला --- जौनपुर, फतेहाबाद, हिसार तथा फिरोजबाद आदि नगरों का निर्माण फिरोज तुगलक के शासनकाल में किया गया । उसके पूर्ववर्ती सुल्तान मुहम्मद तुगलक के शासनकाल में पुरानी दिल्ली के किले का निर्माण कराया गया ।फिरोजशाह तुगलक ने कोटले का किला तथा अन्य बहुत सी इमारतें बनवाई ।
(4)- स्थापत्य कला के अन्य नमूने --- सल्तनत काल में सुल्तानो के अतिरिक्त विभिन्न प्रांतों के शासकों व सूबेदारो ने भी स्थापत्य कला को प्रोत्साहन दिया । यथा
● मुल्तान की स्थापत्य कला --- मुल्तान भी दिल्ली सल्तनत का एक मुुुुख्य प्रांत था ।वहां के सुल्तानो द्वारा बनवाया गया शमसुद्दीन का मकबरा तथा रूक्ने - आलम का मकबरा स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण है ।
● बंगाल तथा कश्मीर की स्थापत्य कला --- बंगाल में अदीना मस्जिद, लोटन मस्जिद, बड़ी सोना मस्जिद, छोटी सोना मस्जिद तथा जलालुद्दीन मुहम्मद शाह का मकबरा सल्तनत काल की स्थापत्य कला के उत्कृष्ट नमूने हैं ।
● मालवा, जौनपुर तथा गुजरात की स्थापत्य कला --- माण्डू मस्जिद तथा हिंडोला महल मालवा की स्थापत्य कला के अद्वितीय उदाहरण हैं ।इसी प्रकार अटाला मस्जिद, काबुली मस्जिद तथा लाल दरवाजा मस्जिद और जौनपुर कला के तथा जामा मस्जिद में पन्द्रह गुम्बद तथा दो सौ खम्भे गुजरात की स्थापत्य कला के सुन्दर उदाहरण हैं ।
● दक्षिण भारत की स्थापत्य कला --- बहमनी शासकों ने गुलबर्गा की मस्जिद बनवाकर स्थापत्य कला का सुन्दर उदाहरण प्रस्तुत किया था ।इसी प्रकार विजयनगर के सुल्तानो ने विजयनगर को एक सुंदर नगर बनवाकर अपनी स्थापत्य कला का विकास किया । इस नगर के संदर्भ में अब्दुर्रज्जाक नामक विदेशी यात्री ने लिखा था कि, " सम्पूर्ण विश्व में न ऐसा नगर देखा गया है और न सुना गया है ।"