वन एवं वन्य प्राणियों का संरक्षण

वनों का संरक्षण- 

                          मनुष्य वनो का उपयोग प्राचीन काल से ही करता आया है वह हमारी व्यवस्था के आवश्यक तत्व और पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए मूल मंत्र है पिछले कुछ वर्षों में विश्व की जनसंख्या बड़ी तेजी से बढ़ रही है जिसके कारण वन्य पदार्थों की मांग भी तीव्र गति से बढ़ी । इससे बड़े पैमाने पर वनो का दोहन हुआ इसके अतिरिक्त वृक्षों की बीमारियों तथा वनों में लगने वाली आग से भी वनों का ह्रास होता है ब्रेवबेकर ने 1948 में अनुमान लगाया कि 1900 में विश्व भर में 700 करोड़ हेक्टेयर भूमि पर वन उगे हुए थे विश्व का वन क्षेत्र घटकर 1975 में 289 करोड़ हेक्टेयर तथा 2000 में 337 करोड़ हेक्टेयर रह गया  अधिकतम हास 40% उष्ण तथा उक्त उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में हुआ है इसके विपरीत शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में केवल 0.6 प्रतिशत का ह्रास हुआ है एशिया और प्रशांत क्षेत्र में सर्वाधिक क्षति हुई क्योंकि इन क्षेत्रों में जनसंख्या तेजी गति से बढ़ रही है एक अन्य अनुमान के अनुसार 1900  में उष्णकटिबंधीय वर्षा वन 160 करोड़ हेक्टेयर भूमि पर उगे हुए थे जो 1975 में घटकर 94 करोड़ हेक्टेयर रह गए वनों का सबसे अधिक विनाश भारत, म्यांमार , तथा श्रीलंका में हुआ है

           उपरोक्त विवरण इससे स्पष्ट होता है कि वनों का संरक्षण आवश्यक है जो निम्नलिखित विधियों से किया जा सकता है ।

1- जहां वन काटे गए हैं वहां पर वन लगाना

2- स्थानीय लोगों में वनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करना भारत में पिचको आंदोलन इसका एक ज्वलंत उदाहरण है

3- वनों को आग से बचाना

4- वनों को बीमारियों से बचाने के लिए कीटनाशक दवाओं का प्रयोग करना ।

वन्य प्राणियों का संरक्षण -

                                       वन्य प्राणी हमारे जीवन में विविधता लाने के में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं वह पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है वन्य प्राणी भोजन श्रृंखला को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं वनों के हास  के साथ साथ वन प्राणी भी कम हो जा रहे हैं इसकी कुछ जातियां तो लुप्त हो गई है अतः इनका संरक्षण आवश्यक है इसके लिए राष्ट्रीय उद्यान तथा वन्य जीव अभयारण्य की स्थापना करना आवश्यक है बहुत सारी देशों की सरकारों ने वन्य प्राणियों की हत्या को अपराध घोषित कर दिया और इससे संबंधित कोई कानून बनाएं भारत में शेर, चीता हिरण, चील , ग्रेट इंडियन बर्ड्स तथा मोर आदि को मारने पर सरकारी तौर पर प्रतिबंध है इन कानूनों को सख्ती से लागू करने से स्थिति में सुधार हो सकता है ।

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