शेरशाह (1540-1545)
सूरवंश का संस्थापक शेरशाह था। शेरशाह द्वितीय अफगान राज्य का संस्थापक था।
इसके बचपन का नाम फरीद था। बिहार के शासक बहार खाँ ने उसे शेरखाँ की उपाधि दिया।
शेरशाह जुनैद बरलास की सहायता से आगरा में बाबर की सेना में उपस्थित हुआ। 1528 ई0 उसने चन्देरी के युद्ध में मुगलों की ओर से लड़ा।
मालवा विजय-1542
रायसीन विजय-1543 पूरनमल के विरूद्ध शेरशाह विश्वासघात से विजय प्राप्त किया था।
अब्बास खाँ सरवानी अपनी पुस्तक तारीखे शेरशाही में शेरशाह को ‘बुद्धिमता और अनुभव में दूसरा हैदर कहा।
इतिहासकार स्मिथ ने लिखा कि यदि शेरशाह कुछ और वर्षो तक जीवित रहता तो भारतीय इतिहास के रंगमंच पर मुगल न आ पाते।
मलिक मुहम्मद जायसी शेरशाह का समकालीन था जिसने पद्मावत की रचना किया।
बिहार-बंगाल - 1574-96
काबुल विजय-1581 यह वही अकबर के लिए सर्वाधिक संकटपूर्ण माना जाता है।
कश्मीर विजय-1585-86
सिन्ध विजय-1591 ई0
उड़ीसा विजय-1592
कंधार विजय-1595
यूसुफजाइयों के विरूद्ध दमन में बीरबल मारा गया था।
अकबर ने दक्षिण में अपना पहला अभियान अहमदनगर के विरूद्ध किया।
अकबर की अन्तिम विजय असीरगढ़ (1601) की थी।
शाहजादा मुराद की मृत्यु (1599) और दानियाल की मृत्यु अतिशय मद्यपान के कारण हुई।
जौनपुर का काजी मुल्ला मुहम्मद याजदी ने अकबर के विरूद्ध फतवा जारी किया था।
अबुल फजल की हत्या 1602 में ओरछा के बुन्देला सरदार वीर सिंह देव ने की थी।
-शेष अगले भाग में