शेरशाह (1540-1545) - 2

अकबर की मृत्यु अतिसार के कारण 1605 ई0 में हुई।

      1529ई0 में बंगाल के शासक नुसरत शाह को पराजित करने के बाद शेरखाँ ने हजरत-ए-आला की उपाधि धारण की थी।

      शेरशाह ने उत्तरी पश्चिमी सीमा को सुरक्षित करने के लिये रोहतासगढ़ नामक एक किला का निर्माण करवाया।

      शेरशाह ने मारवाड़ के युद्व (1544ई0) में विजय के बाद कहा था, श्मैं मुट्ठी भर बाजरे के लिए लगभग हिन्दुस्तान का साम्राज्य खो चुका थाश्। इस समय मारवाड़ का राजपूत शासक मालदेव था।

      शेरशाह ने अपना अन्तिम आक्रमण कलिंजर पर किया वहाँ का चंदेलवंशी शासक कीरत सिंह था। वही पर आग्नेय अस्त्रांे को दागते वक्त हुये चूक से उसकी मृत्यु हो गयी थी।

      उसने दिल्ली मंे किला-ए-कुहना नामक एक मस्जिद का निर्माण करवाया था।

      शेरशाह ने 178 ग्रेन चाँदी का रूपया एवं 380 ग्रेन ताँबे के दाम चलवाये। इसके शासन काल में चाँदी के रूपये एवं ताँबे के दाम का विनिमय अनुपात 1ः64 था।

      कबूलियत के रूप मेें किसानो को पट्टा देने की शुरूआत शेरशाह ने की थी।

      शेरशाह ने ग्रैण्ड टैंªक रोड नामक इतिहास प्रसिद्ध रोड का निर्माण करवाया था। इसका प्रारम्भिक नाम शेरशाह सूरी मार्ग था। गवर्नर जनरल आकलैण्ड के समय में इसका नाम जी0टी0 रोड पड़ा।  

      ग्रैण्ड टैंªक रोड बंगाल में सोनार गाँव से शुरू होकर दिल्ली, लाहौर, होती हुयी पंजाब में अटक तक जाती थी।

      शेरशाह का मकबरा सासाराम (बिहार) में एक झील के बीच स्थित हैं।

      शेरशाह की राजस्व व्यवस्था रैय्यतबाड़ी थी। भूराजस्व निर्धारण के लिए रई अथवा फसल दरों की सूची तैयार की गयी थी। भूराजस्व 1/3 था।

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