भारतीय अर्थव्यवस्था पर आरबीआई की रिपोर्ट 2017-18

  •  भारतीय रिजर्व बैंक की वर्ष 2017-18 की वार्षिक रिपोर्ट 29 अगस्त,  2018 को जारी की गईग 
  • रिजर्व बैंक की स्वयं की क्रियाकलापों के अतिरिक्त अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं मुख्यतः बैंकिंग परिदृश्य का लेखा-जोखा रिपोर्ट के प्रस्तुत किया गया है। 
  • रिपोर्ट के अनुसार अच्छे मानसून एवं औद्योगिक गतिविधियों  मैं तेजी के कारण चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 में देश में 7.4 प्रतिशत की विकास दर का अनुमान है
  • 2017-18 की दूसरी छमाही में विकास दर में वृद्धि की जो स्थिति बनी थी उसके आगे भी जारी रहने की संभावना है। 
  • इसके चलते 2018-19 में विकास दर से 1.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है वर्ष 2017 18 में यह वृद्धि 6.7%ही रही थी।
  • खनन गतिविधियों एवं विनिर्माणी  इन क्षेत्रों में लगातार बेहतर प्रदर्शन के साथ-साथ अच्छे मानसून से अर्थव्यवस्था में तेजी आई है।
  • रिपोर्ट के अनुसार सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में भी सुधार हुआ है बैंकों में बढ़ते हुए घोटालों पर चिंता इस रिपोर्ट में व्यक्त की गई है इसमें बताया गया है कि मार्च 2018 के अंत में देश के सभी बैंकों की गैर निष्पादन परिसंपत्तियों (NPAs)  व रिस्ट्रक्चर्ड लोन इन बैंकों द्वारा प्रदत कुल वर्णों के 12.1 प्रतिशत तक पहुंच गए थे। 
  •  रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2015 के अंत में देश के सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का सकल NPAs रुपये 3,23,464 करोड़ था, जो बढ़कर वर्ष 2018 के अंत में यूपीए 10,35,528 करोड़ हो चुका था। 
  • बैंकों की होने वाले घोटालों की संख्या विगत 10 वर्षों में औसतन 4500 रही है, जबकि 2017-18 में 5835 घोटाले बैंकों द्वारा दर्ज कराए गए। 
  • विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के (FDI)  पर प्रकाश डालते हुए आरबीआई ने बताया है कि भारत इस मामले में पसंदीदा देश बना हुआ है, वर्ष 2015-16 में कुल 36.06 अरब डालर पूंजी  का अन्तप्रर्वाह एफडीआई के तहत हुआ,  2016-17 में यह राशि 36.3अरब  डॉलर रही जबकि 2017-18 में 37.3 अरब डालर का पूंजी अन्तप्रर्वाह इस मद  में हुआ। 
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