भारतीय संविधान में उल्लिखित मूल अधिकार और नीति निदेशक तत्व के मध्य अंतर स्पष्ट करेंगे।

मूल अधिकार और नीति निदेशक तत्व में अंतर:-

1. मूल अधिकार न्यायालय के द्वारा परिवर्तनीय है अर्थात वाद योग्य है , जबकि नीति निदेशक तत्व न्यायालय के द्वारा अप्रवर्तनीय है।


 ‎2. मूल अधिकार अधिकांशतः नकारात्मक है जो राज्य को कुछ करने से मना करता है , जबकि नीति निदेशक तत्व अधिकांशतः सकारात्मक है जो राज्य को कुछ करने का निर्देश देता है ।

3. मूल अधिकारों में अनुच्छेद 368 के द्वारा ही विशेष बहुमत से संशोधन किया जाएगा, अन्यथा नहीं । जबकि नीति निदेशक तत्वों में संशोधन के लिए सामान्य प्रक्रिया अपनाई जाएगी ।


4. ‎मूल अधिकार के अंतर्गत इसका त्याग नहीं किया जा सकता है। जैसे- जीवन के अधिकार में मरने का अधिकार शामिल नहीं है । जबकि नीति निदेशक तत्व में इसके बारे में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।


5. ‎मूल अधिकार व्यक्तिगत विकास से संबंधित है । जबकि नीति निदेशक तत्व जनकल्याण से संबंधित है ।


6. ‎मूल अधिकार में, अनुच्छेद 352 के अंतर्गत राष्ट्रीय आपातकाल के लागू होने पर अनुच्छेद 19 स्वत: निलंबित हो जाएगा । अनुच्छेद 359 के द्वारा राष्ट्रपति अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर शेष मूल अधिकारों को निलंबित कर सकेगा । जबकि नीति निदेशक तत्व में ऐसा कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है।


7. ‎मूल अधिकार राजनीतिक लोकतंत्र को स्थापित करता है । जबकि नीति निदेशक तत्व सामाजिक एवं आर्थिक लोकतंत्र को स्थापित करते हुए लोक कल्याणकारी राज्य का मार्ग निर्धारित करता है ।

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