गुरु अर्जुन देव सिक्ख धर्म के 5वें गुरु थे उन्होंने सिक्ख सम्परदाय को और भी मजबूत बनाया । उन्होंने सिक्ख पन्थ के लिए जो कार्य किये, वे इस प्रकार है :-
- उन्होंने सिक्खों के लिए प्रत्येक वर्ष वैशाखी के दिन अपनी आय के 1/10 गुरु को देना अनिवार्य प्रारम्भ किया। अमृतसर नामक शहर के निर्माण को पूरा कराया।
- अमृतसर सरोवर को पक्का करवाया तथा वहां पर हरमंदिर साहब नामक सिक्खों के एक पवित्र मन्दिर का निर्माण करवाया । इस मंदिर की नींव अर्जुनदेव ने प्रसिद्ध सन्त मिया मीर के द्वारा डलवायी। कालांतर में रणजीत सिंह के द्वारा इसे स्वर्ण मंडित करवाया गया। अंग्रेजो ने इसे पहली बार गोल्डन टेम्पल या स्वर्ण मंदिर नाम दिया गया।
- गुरु अर्जुनदेव ने सिक्खों के अत्यंत पवित्र ग्रंथ आदिग्रंथ का संकलन करवाया । इसमे सिक्खों के पांच गुरु तथा अटठारह भक्ति एवं सूफी संतों यथा- कबीर, बाबा फरीद , नामदेव , रैदास आदि के उपदेशों का संग्रह भी है।
- अर्जुनदेव राग गौड़ी में 24 अष्टपदी नामक एक ग्रंथ की भी रचना की , जिसे सुखमनी साहब कहकर पुकारा जाता है। यह उनकी एक प्रसिद्ध व उत्कृष्ट रचना मानी जाती है।
5. गुरु अर्जुन देव ने ही तरणतारण नामक एक प्रसिद्ध शहर की स्थापना की और वहां विशाल सरोवर तथा गुरुद्वारे का निर्माण करवाया।