शेख नसीरुद्दीन चिराग देलहवी की परम्परा में एक प्रसिद्ध चिश्ती संत शेख सलीम चिश्ती का नाम आता है, जो कि अकबर व जहांगीर के समकालीन थे और उनका जन्म फतेहपुर सीकरी में हुआ था कहा जाता है कि अकबर को जहांगीर नामक इसी सलीम चिश्ती के आशीर्वाद से हुआ था। इसीलिए उन्होंने जहांगीर का मूल नाम सलीम रखा था। अकबर जहांगीर को प्यार से शेखो बाबा कहकर भी पुकारते थे। शेख सलीम चिश्ती की मृत्यु के बाद अकबर ने फतेहपुर सीकरी में उनके नाम की मजार का निर्माण करवाया था।
चिश्ती सिलसिले के सिद्धान्त :-
- इसके सन्त गरीबी पूर्ण जीवन जीने में विश्वास करते थे, इसलिए उन्होंड किसी भी प्रकार के राज्य संरक्षण को स्वीकार नही किया ।
- मूल इस्लामधर्म के विपरीत चिश्तियों ने अपने खानकाहों में संगीत को महत्व दिया। इनके द्वारा आयोजित संगीत सभा को समां कहा जाता है। शेख मोईनुद्दीन चिश्ती के अनुसार संगीत आत्मा का भोजन है।
- साधारणतया ये राज्य से कोई अनुदान नही लेते थे , परंतु जो धनवान व्यक्ति अपनी इच्छा से उन्हें कुछ दे देते थे तो उसी से वे अपना जीवन निर्वाह करते थे।