गुरु हरगोविन्द, गुरु अर्जुनदेव के पुत्र एवं उत्तराधिकारी बने। गुरु हरगोविन्द को जहांगीर ने ये कहा था कि वे अपने पिता के ऊपर लगे जुर्माने की रकम चुकाए और जब गुरु ने ऐसा करने से इनकार कर दिया तब उन्हें भी मुगल बादशाह जहांगीर के द्वारा कैद कर दो वर्षों तक ग्वालियर के दुर्ग में रख दिया गया। उनके काल की अन्य महत्वपूर्ण बातें थी-
- शाहजहां के काल मे पालतू बाज को लेकर गुरु औ मुगलों में संघर्ष हुआ था।
- सिक्खों का एक लड़ाकू जाति के रूप में परणित हो जाना । उन्होंने अपने अनुयायियों के शस्त्र रखने और मुगल के अत्याचार के विरूद्ध उठ खड़े होने का आह्ववान किया । वे सदा सैनिक के वेशभूषा में रहते थे। उन्होंने अपने समर्थकों से धन के बजाए घोड़े व हथियार लेना प्रारम्भ कर दिया तथा उन्हें मांस खाने की अनुमति दे दी
- गुरु हरगोविन्द ने अकाल तख्त की नींव डाली। इस तख्त की ऊंचाई12 फ़ीट थी
- इन्होंने अमृतसर के निकट एक किले का निर्माण अपने सैनिकों के निवास हेतु कराया था, जिसे लौहगढ़ का किला कहकर पुकारा जाता है।
- जहांगीर के किले में इंनको दो वर्ष तक बन्दी बना केर रखा गया।
- इन्होंने सिक्खों में सैनिक भावना , सैनिक शिक्षा एवं स्व-रक्षा के लिए शस्त्र धारण करने की क्रिया प्रारम्भ की।