गुरु हरिराय(1643-61) :-
ये सिक्ख धर्म के सातवें गुरु थे और चौदह वर्ष की अवस्था में गुरु बने थे। इस गुरु के सम्बन्ध मुगलो से अच्छे रहे थे इन्होनें दारा की सैनिक सहायता और आशीर्वाद दोनों प्रदान किया था , जबकि दर उत्तराधिकार के युद्ध में विजयी न हो सका। साथ ही उन्होंने शाहजहां तथा इसके बाद औरंगजेब के साथ उनके सम्बंन्द्ध खराब हो गए , इसकेे पीछे की वजह थी कि सामूगढ़ यूुद्ध में पराजित दारा को उन्होंने पंजाब भागने में मदद पहुंचाई थी।
गुरु हरिकिशन (1661-64) :-
गुरु हरिकिशन, हरिराय के छोटे पुत्र व सिक्खों के आठवें गुरु थे। इन्होंने मात्र 5 वर्ष की अवस्था में गद्दी संभाली थी । उन्होंने अपनी छोटी सी उम्र में ही अपने धार्मिक प्रवचन से औरंगजेब को आश्चर्यचकित कर दिया था। उनकी मृत्यु के पूर्व कहा जाता है कि दिल्ली स्थित आगरे के राजा जयसिंह के बंगले में ठहरे थे। उस समय नगर में संक्रामक चेचक उग्र रूप से फैला हुआ था। चेचक रोगियों की सेवा में खुद उन्हें चेचक हो गया और 30 मार्च 1664 में आठ वर्ष की उम्र में ही उनकेी मृत्यु हो गई।