अकबर ने जैनगुरू हरिविजय सूरि को जगद् गुरू की उपाधि एवं जिन चन्द्र सूरी को युगप्रधान की उपाधि दी।
अकबर के नौ रत्नो में से एक दीवान राजा टोडरमल ने 1580ई0 में लगान व्यवस्था मे एक नये इंतजाम दंहसाला बन्दोंबस्त की शुरूआत की।
अब्दुसम्मद, दसवंत एवं वसावन अकबर के दरबार के प्रसिद्व चित्रकार थे।
अकबर के दरबार में प्रसिद्व संगीतकार तानसेन निवास करता था।
अकबर ने 1575 ई0 में फतेहपुर सिकरी में इवादत खाने की स्थापना की थी।
अकबर ने 1579ई0 मंे महजर जारी किया था। इसे शुख मुबारक ने तैयार किया। स्मिथ एवं वुजलेहेग वे इसे ‘अचूक आज्ञापत्र’ कहा।
अकबर ने 1583ई0 में एक नये संवत इलाही संवत की शुरूआत की थी। उसने भूमि पैमाइश के लिए एक नये गज श्इलाही गजश् की शुरूआत की
अकबर को सिकन्दराबाद के निकट दफनाया गया है।
फैजी अकबर के दरबार में राज कवि मलिक-उश-शोअरा थे।
फैजी के भाई अबुल फजल ने एतिहासिक कृति अकबरनामा की रचना की थी। इसी का तीसरा भाग आइने अकबरी है।
कण्ठाभरण वाणी विलास की उपाधि अकबर ने तानसेन को दिया।
अकबर ने भगवानदास को अमीर उल उमरा की उपाधि दी।
महाभारत का फारसी भाशा में ष्रज़्मनामाष् नाम से अनुवाद वदायूॅनी, नकीबखाँ एवं फैजी मुल्लाशेरी बदायूँनी ने रामायण का अनुवाद किया।
-शेष अगले भाग में