मी टू अभियान यौन उत्पीड़न और हमले के खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय आंदोलन है इसकी शुरुआत अक्टूबर 2017 में हॉलीवुड के बड़े निर्माताओं में शामिल हार्वे वेनस्टीन पर कई महिलाओं द्वारा यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म के आरोप लगाए जाने के बाद हुई थी । मी टू के माध्यम से महिलाएं अपने खिलाफ उत्पीड़न के मामले तेजी से सोशल मीडिया पर शेयर कर रही हैं । यह अभियान भारत में इतनी तेजी से फैल रहा है कि नेता से लेकर अभिनेता तक इसके दायरे में आ रहे हैं । इसकी कुछ घटनाएं तो एक दशक पुरानी भी हैं सवाल यह उठता है कि अब तक आवाज क्यों नहीं उठाई गई। यह पुरुष के लिए भले ही सामान्य हो , परंतु कई महिलाएं आत्महत्या जैसे कदम भी उठा लेतीे हैं । एक तरफ तो हम महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ महिलाओं के उत्पीड़न के मामले रोज सामने आते हैं , ऐसे में कैसे सशक्त होगी महिलाएं । महिलाओं का सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करना समाज का प्रमुख प्राथमिकता होनी चाहिए लेकिन यही समाज उनके लिए असुरक्षित भी है हालांकि इसके खिलाफ यौन उत्पीड़न रोकथाम, निषेध और निवारण अधिनियम -2013 तथा महिला भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत आपराधिक शिकायत दर्ज कराने का विकल्प भी है ।इसी के साथ मी टू अभियान उन महिलाओं को अपने उत्पीड़न की बयां करने का मंच बनकर सामने आया है । उसी प्रकार जरूरत है कि इन कानूनों को कठोरता पूर्वक लागू करने के साथ ही महिलाओं की सुरक्षा के लिए नए नियम कानून की आवश्यकता है जिससे महिला सशक्तिकरण सुनिश्चित हो सके ।