एल-नीनो जलधारा

एल- निनो :-

यह एक प्रतिधारा है जो दक्षिण अमेरिका के पूर्वी तट के पश्चिम में 180 किमी.  की दूरी से उत्तर पश्चिम दिशा में चलती है। यह एक गर्म जलधारा है जो कि प्रशांत महासागर से होकर हिन्द महासागर में प्रविष्ट हो कर  भारतीय मानसून को प्रभावित करती है।

  वर्तमान समय में एल निनो को एक मौसमी घटना के रूप में लिया जाता है। एलनिनो को येशु शिशु (Christ child) भी कहा जाता है। ज्ञातव्य है कि पेरू तट के पास  पेरू की ठण्डी जलधारा दक्षिण से उत्तर की दिशा में चलती है तथा पेरू का सागर तटीय भाग रेगिस्तानी है। शरद काल में विषुवतीय रेखिय विपरीत धारा  दक्षिण की ओर खिसक जाती है और एल निनो को जन्म देती है। इसके आगमन पर सागरीय जल का तापमान सामान्य से 3-4° से बढ़ जाता है।

   मई के अंत तक सूर्य भारत में कर्क रेखा के पास चमकता है फलस्वरुप भारत में स्थल पर उच्च ताप, निम्न दाब और ITCZ की पेटी स्थापित हो जाती है, जिसकी तरफ दक्षिणी गोलार्द्ध की व्यापारिक पवने  भूमध्य रेखा को पार कर फेरल के नियमानुसार अपने दाहिने मुड कर दक्षिण पश्चिमी मानसून बन जाती है इस समय हिन्द महासागर पर उच्च वायु दाब होता है। जितना अधिक उच्च वायुदाब होता है भारतीय मानसून भी उतना ही अधिक तेज होता है, किन्तु एल निनो धारा का गर्म जल हिन्द महासागर के ऊपर की हवाओ को गर्म कर ऊपर उठा देता है जिससे हिन्द महासागर में वायुदाब निम्न हो जाता है, फलस्वरूप भारतीय मानसून कमजोर हो जाता है, जिसके कारण भारत सहित बांग्लादेश तथा इंडोनेशिया सूखे की चपेट में आ जाता है। यही एल निनो प्रभाव कहलाता है।

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