नक्शबंदी सिलसिला

नक्शबन्दी सिलसिले के प्रवर्तन का श्रेय  बहाउद्दीन नक्शबंदी को जाता है, परंतु भारत में इस सिलसिले को लाने वाले सूफी ख्वाजा बाकि बिल्ला थे, जो अपने पीर की आज्ञा से काबुल से भारत आये । उस समय भारत में अकबर का शासन था । बाकी बिल्ला के एक प्रसिद्ध शिष्य का नाम शेख अहमद फारुखी सरहिन्दी था, जिन्होंने नक्शबंदी सिलसिले को भारत मे काफी लोकप्रिय बना दिया। शेख अहमद सरहिन्दी  अकबर व जहांगीर के समकालीन थे , अर्थात इन्होंने दो मुगल शासकों का शासनकाल देखा था। इन्हें मुजद्दीद कहकर पुकारा जाता है। मुजद्दीद का तात्पर्य ईस्लाम का सुधारक।

 नक्शबंदी सिलसिले का सिद्धान्त :-

  1. इस सिलसिले को सूफी साधको का प्रमुख उद्देश्य ईस्लाम की खोई हुई प्रतिष्ठा को पुनः स्थापित करना तथा हदीस के नियमो के पालन पर जोर देना था।
  2. इन्होंने सिया सम्प्रदाय की भी कटु आलोचना की। इनके अनुसार सिया मत मूर्तिपूजकों से भी बुरा है।
  3.  ये लोगो ने संगीत को वहीं तक मानने को तैयार  थे , जहां तक वे मुूूल ईस्लाम की शिक्षाओं पर अनुमोदन करते थे
  4. नक्शबंदी सिलसिले के सन्त राज्यों से सम्बन्ध बनाने के पक्ष में थे। 
  5. ये नक्शबंदी सन्त तरह तरह के नक्शे आध्यात्मिक तत्वों के सम्बंध में बनाया करते थे और उसे अनेक रंगों से भरते थे। इसीलिए इनके अनुयायी नक्शबंदी कहलाये।
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