गुरु तेगबहादुर ने सिक्खों के 9वें गुरु के रूप में 1664 में गद्दी को ग्रहण किया । इनको भी औरंगजेब के दमन का शिकार होना पड़ा था। गुरु होने के पूर्व वस अमृतसर के निकट बकाला गांव में 20 वर्ष तक भजन, प्रार्थना और ध्यान में मग्न रहे। वहीं पर आज बाबा बकाला तथा गुरुद्वारा बना हुआ है।
गुरु तेगबहादुर का प्रसिद्ध मुगल शासक औरंगजेब के साथ संघर्ष हुआ था। दारुल हर्ब को दारुल ईस्लाम में तब्दील करने के लिए कश्मीर के गवर्नर शेर अफगान ने औरंगजेब की नीति के अनुसार, वहां के हिंदुओं पर जबरदस्त जुल्म ढाये । तब वहां के ब्राह्मणों ने कृपाराम के नेतृत्व में आनंदपुर में रह रहे सिक्ख केे 9वें गुरु गुुुरु तेगबहादुर के यहां दुहाई दी । सत्य की रक्षा धार्मिक स्वतंत्रता तथा अन्याय केे विरुद्ध युद्ध के लिए तेगबहादुर आगेे आये । तब औरंगजेब की सेना ने उन्हें कैैैैदकर दिल्ली में औरंगजेब के सामने प्रस्तुत किया।
औरंगजेब ने प्रधान काजी अब्दुल वहाब बोहरा के माध्यम से गुरु साहब को पिंजरे में बंद करवाया और उन्हें 11 नवंबर 1675 को दिल्ली स्थित चांदनी चौक ले जाया गया और वहीं पर उनका कत्ल कर दिया गया। उनकी बलिदान की याद में आज भी वहां शीश गंज गुरुद्वारा खड़ा है जिसको 1790 में सरदार बघेल सिंह करोड़ ने बनवाया था।