बाघ की गुफाओं का परिचय एंव संख्या
बाघनी नदी और बाघ गाँव के आधार पर इन गुफाओं का नाम बाघ गुफा पड़ा। पाँचवीं शदी ई0 में इन्हें कलियन कहा जाता था।
आज स्थानीय लोग बाघ की गुफाओं को पंच पाण्डव की गुफा कहते है।
विन्ध्य पर्वत के दक्षिणी ढाल पर बाघ नदी के किनारे 150 फिट की ऊँचाई पर खुदी कुल यहाॅ 9 गुफायें है,जिनके सम्मुख भाग की लम्बाई लगभग 750 फीट है।
पहली गुफा- इसको गृहगुफा के नाम से भी जाना जाता है। यह भिक्षुओं के आवास के लिए बनायी गयी थी अब कोई चित्र इसमें शेष नहीं है।
दूसरी गुफा- गुसाई अथवा पंच पाण्डु की गुफा स्थानीय नाम दिया है। यह वर्गाकार आकार का चैत्य है। इस गुफा से महाराज सुबन्धु का ताम्र पत्र प्राप्त हुआ है।
तीसरी गुुुफा- स्थानीय लोगों ने इसे हाथी खाना नाम दिया है। दीवारों पर बुद्ध और बोधिसत्व के चित्र शायद थें यह विशिष्ट अतिथियों के लिए था।
चैथी गुफा- इस गुफा का स्थानीय नाम रंग महल दिया गया है। इसमें चित्र सुरक्षित है। इसी गुफा के बाहर बरामदे में 45 फिट लम्बा 6 फिट चैड़ा टुकड़ा शेष है जिसमें आकर्षक चित्र मिलते है। इसमें 6 दृश्य है।
पाँचवी गुफा- इसे पाठशाला कहा गया है,यह दो स्तम्भों की पंक्तियों पर टिका था। स्तम्भों,दीवारों तथा छतों पर अंकन किया गया है।
6वीं गुफा- इसमें 46 वर्ग फीट का मंडप है,जिसके साथ पाँच कोठरियाँ भी काटी गयी है।
7वीं,8वीं,9वीं गुफा पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।