एलिफैन्टा  प्राचीन नाम धारापुरी-जोगेश्वरी (मुम्बई)

               एलिफैन्टा  प्राचीन नाम धारापुरी-जोगेश्वरी (मुम्बई)

    मुम्बई में गेटवे आॅफ इंडिया के निकट स्थित अपोलोबन्दर से समुद्र में 7 मील उत्तर-पूर्व की ओर एक छोटे से द्वीप पर एलीफैन्टा स्थित है। यहाॅ जाने के लिए मोटर वोट से दो घण्टे की यात्रा करनी पड़ती है।
    इसका प्राचीन नाम धारा नगरी था।
    राष्ट्रकूटों के सामान्त शिलाहार वंशी राजाओं ने 9वीं से 13वीं शदी के बीच यहाॅ सुन्दर गुफाओं को उन्कीर्ण कराया।
    यहाॅ शिव की विविध लीलाओं-महायोगी,नटराज,भैरव,पार्वंती परिणय,अर्द्धनारीश्वर,कैलाशधारी,महेशमूर्ति,त्रिमूर्ति (विशेष प्रसिद्ध) आदि की सुन्दर मूर्तियों का निर्माण हुआ है।
    मुख्य गुफा में एक विशाल मण्डप है,जिसके चारो ओर प्रदक्षिणापथ है। वर्गाकार गर्भगृह में विशाल शिवलिंग स्थापित है। चबूतरे से गर्भगृह में जाने के लिए सीड़ियाँ बनी है।
    धारापुरी का नाम पुर्तगालियों ने यहाॅ पर प्राप्त एक विशाल हाथी की मूर्ति के आाधार पर एलीफैन्टा रखा।
    यहाॅ पर प्राप्त हाथी की मूर्ति वर्तमान में प्रिंस आॅफ वेल्स म्यूजियम बम्बई (राजा गार्डेन) में रखी गयी है।
    यहाॅ पर कुल 9 आकृतियाँ प्राप्त है। सभी भगवानशिव से संबंधित है,जिनमें सबसे प्रसिद्ध त्रिमूर्ति है। इस मूर्ति में भगवान शिव के तीनो रूपों को दर्शाया गया है।
    त्रिमूर्ति में ब्रह्मा, विष्णु,महेश तीनों देवता सम्मिलित है,जो आकार में 24×17 फीट ऊँची है।
    एक मूर्ति पंचमुख परमेश्वर रूप में प्राप्त है।
    एक मूर्ति में भगवान शंकर की जटाओं में गंगा,यमुना और सरस्वती की लहराते हुये दिखाया गया है।
    एक मूर्ति में भगवान शंकर और माता पार्वती के विवाह को दर्शाया गया है।
    एक मूर्ति में भगवान शिव के भैरव अर्थात संहारकारी रूप का अंकन है।
    इस टापू पर दो बड़े-बड़े पर्वतों को तराश कर मंदिरों का निर्माण किया गया है,जिसकी मूर्तियाँ विश्वभर में प्रसिद्ध है।
प्रमुख चित्र-    1. शिव द्वारा अंधक राक्षस का संहार
                   2. शिव और पार्वती विवाह
                   3. शिव गंगाधर के रूप में
                   4. योगीराज शिव की मूर्ति
ऊँचाई 18 फुट- 5. महेश मूर्ति- गार्डन चाइल्ड के अनुसार- इस मूर्ति को न देखता तो एक महान कलाकृर्ति के दर्शन से वंचित रह जाता।
                     6. ब्रह्मा की मूर्ति
                     7. शिव का अर्धनारीश्वर रूप 
                    8. रावण कैलास पर्वत उठाते हुए
                   9. पार्वती मान मूद्रा में।  
नोट- 1. शिव के सिर के ऊपर त्रिमुखी स्त्री आकृति का अंकन विशेष महत्वपूर्ण है,जो न केवल गंगा वरन गंगा,यमुना एंव सरस्वती की त्रिवेणी का संकेत है।
       2. एलीफैन्टा का गुहामंदिर लगभग 130 फुट वर्गाकार में है।
       3. शिव तांडव की खण्डित मूर्ति- (नटराज) यह मूर्ति अनेक स्थानों से खण्डित हो जाने पर भी भावमग्न नृत्य,सुन्दर व सजीव मुद्राओं और ब्राह्मण की शक्तियों के उद्भव का संकेत देती है। तथा गति से ओत-प्रोत है। इस प्रतिमा की सभी भुजायें ध्यानावस्था में है। अवशेष भागों से यह पता चलता है,कि यह मूर्ति आठ भुजाओं की थी।
 

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