भले ही स्थिति परेशान करने वाली ना हो लेकिन आंकड़े चिंतित करने वाले तो है ही। केंद्र सरकार ने महंगाई के पिछले महीने के जो आंकड़े पेश किए हैं। वह अर्थव्यवस्था के रुझान के बारे में बहुत कुछ कहते हैं सितंबर महीने में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई जानी मुद्रास्फीति 4.3% रही जबकि अगस्त महीने में यह 3.4% पर थी विस्तार में जाए तो तस्वीर कुछ और ही कहती है एक तरफ या महंगाई बढ़ रही है खाद्य पदार्थों की कीमतें काफी तेजी से नीचे आई है। अगस्त महीने में खाद्य पदार्थों की महंगाई 4.04% पर थी जो पिछले महीने 0 से भी नीचे चली गई और सब्जियों के मामले में तेजी से नीचे गई है। वह तो चिंता पैदा करने वाला है अगस्त महीने में सब्जियों की मुद्रास्फीति थी। जो सितंबर में शून्य से नीचे जाकर 3.2 83% पर रुक गई है दालों के मामले में हालात और भी चिंताजनक है अर्थशास्त्र में महंगाई यानी मुद्रा स्थिति का बहुत ज्यादा या बहुत तेजी से बढ़ता चिंता जनक माना जाता है लेकिन यह अगर यही मुद्रास्फीति शून्य से नीचे जाने लगे तो इसे संकट की तरह देखा जा सकता है हालांकि 1 महीने के आंकड़ों से हम कोई बहुत बड़ा नतीजा नहीं निकाल सकते।
लेकिन खाद्य मुद्रास्फीति के यह आंकड़े आने वाले समय में किसानों की मुसीबतें बढ़ा सकते हैं। खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों के बीच थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के बढ़ने का राज छुपा है ईंधन की बढ़ती कीमतों से पिछले महीने पेट्रोल की मुद्रास्फीति 17.1% रही। जबकि डीजल की 22.18% हालांकि यह आंकड़े बताते हैं कि इस बीच खुदरा मुद्रास्फीति बहुत ज्यादा नहीं बढ़ रही अगस्त में वह 3.38 प्रतिशत थी। जो सितंबर में बढ़कर 3.7% हो गई इसके साथ ही फैक्ट्रियों में बड़े उत्पादों के दाम भी बड़े हैं।