भारत की जलवायु

भारत के विशाल भौगोलिक स्वरूप के कारण इसके विविध क्षेत्रों में जलवायु का भिन्न होना आवश्यक है। किंतु मानसूनी प्रभाव के कारण देश की जलवायु में विभिन्नता में भी कुछ हद तक समानता दिखाई देती है।

  • भारत में तीन चौथाई से अधिक वर्षा ग्रीष्म काल दक्षिण पश्चिम मानसून से होती है।
  • भारत की जलवायु पर कर्क रेखा की स्थिति, उत्तर में हिमालय पर्वत एवं तिब्बत के पठार की स्थिति, प्रायव्दीपीय स्थललाकृति ,स्थल व जल के वायुदाब में अंतर, समुद्र तट से दूरी, समुद्र तल से ऊंचाई, उच्चावच आदि का प्रभाव पड़ता है।
  • भारत सामान्यतः उष्णकटिबंधीय जलवायु क्षेत्र के अंतर्गत आता है। इस प्रकार यहां की जलवायु पर दो प्रकार की मौसमी पवनों का प्रभाव देखने को मिलता है- उत्तर पूर्वी मानसूनी पवन तथा दक्षिण पश्चिम मानसूनी पवनह
  • भारत में अधिकांश वर्षा दक्षिण पश्चिमी मानसूनी पवन के कारण होती है।
  • उत्तर पूर्वी मानसूनी हवाओं को सामान्य तौर पर शीतकालीन मानसून के नाम से जाना जाता है तथा यह हवाएं स्थल से समुद्र की ओर प्रवाहित होती है। इन पवनों से शीतकाल में तमिलनाडु के तटों पर वर्षा होती है।

मौसम वैज्ञानिकों ने संपूर्ण वर्ष को चार ऋतुओं मैं विभाजित किया है-

  1. शीत ऋतु सामान्य तौर पर यह रितु उत्तर भारत में नवंबर के मध्य में से आरंभ होती है।
  2. ग्रीष्म ऋतु मार्च के महीने में सूर्य के कर्क रेखा की ओर खिसकने के कारण उत्तर भारत के तापमान में बढ़ोतरी देखी जाती है।
  3. वर्षा ऋतु वर्षा ऋतु जून से सितंबर तक होती है।
  4. मानसून ने निवर्तन की ऋतु नवंबर का महीना मानसून के निवर्तन का काल होता है। 
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