जलालुद्दीन फिरोजशाह खिलजी ( 1290 - 1296 ई. )

● जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने क्यूमर्स की हत्या कर शक्ति द्वारा दिल्ली के सिंहासन पर  अधिकार कर लिया । उसने  1290  में कैकुबाद द्वारा बनवाये गये अपूर्ण किलोखरी के महल में अपना राज्याभिषेक किया ।

● जलालुद्दीन खिलजी दिल्ली सल्तनत का पहला सुल्तान था जिसकी आन्तरिक नीति दूसरों को प्रसन्न करने के सिद्धांत पर आधारित थी । उसने हिन्दू जनता के प्रति भी  उदार दृष्टिकोण अपनाया । उसने तुर्को, गैर तुर्को, भारतीय मुसलमानों को शासन में सम्मिलित करके भारत के मुस्लिम राज्य को विस्तृत  आधार प्रदान किया ।

● जलालुद्दीन के अनुसार " भारत का कोई भी राज सही  अर्थो में इस्लामी नहीं हो सकता " । ईरान से आये फेकीर सीदी मौला के समर्थकों ने जलालुद्दीन खिलजी के विरूद्ध षड्यंत्र किया,  किंतु षड्यंत्र  असफल रहा और सीदी मौला को हाथी के पैरों तले कुचलवा दिया गया ।

● विद्रोहियों के प्रति जलालुद्दीन ने दुर्बल नीति का अनुसरण किया और कहा " मैं एक वृद्ध मुसलमान हूं और मुसलमानों का रक्त बहाने की मेरी आदत नहीं है "।

● इसके समय में चंगेज खा के वंशज  उलगू ने अपने समर्थकों के साथ इस्लाम धर्म स्वीकार करके भारत में रहने का निश्चय किया  और दिल्ली के निकट मुगलपुर में बस गया ।ये ' नवीन मुसलमान ' कहलाये ।

● 1296  ई. में अलाउद्दीन खिलजी ने देवगिरि पर  आक्रमण कर दिया । मुसलमानों का दक्षिण भारत पर यह पहला  आक्रमण था । अलाउद्दीन यहां से अकूट सम्पत्ति लेकर वापस लौटा ।

● जलालुद्दीन  1296 ई  में अलाउद्दीन को देवगिरि की सफलता की बधाई देने कड़ा मनिकापुर  ( गंगा नदी के तट पर) पहुंचा ।अलाउद्दीन ने वहां जलालुद्दीन का वध कर स्वयं को सुल्तान घोषित कर दिया ।

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