दिल्ली शहर ना केवल भारत की राजधानी है बल्कि दिल वालों का शहर भी है, जहाँ इतिहास और वर्तमान हाथ थामे चलते हैं। यहाँ का इतिहास बहुत लम्बा-चौड़ा और उतार-चढ़ावों से भरा है। दिल्ली शहर ने बहुत सी संस्कृतियों को अपनाया है और उन अलग-अलग संस्कृतियों की झलक इस मेट्रोपोलिटन शहर की कला, खानपान, रहन-सहन, त्यौहारों और जीवनशैली में दिखाई देती है। इस शहर में घूमने के लिए इतनी सारी ऐतिहासिक जगहें हैं, जिन्हें देखकर आप आनंदित हो जाएंगे। ऐसे में क्यों ना आज दिल्ली की सैर की जाए, ताकि दिल वालों के इस शहर को करीब से देखा जा सके। तो चलिए, आज दिल्ली के प्रमुख पर्यटन स्थल का भ्रमण करते हैं–
राष्ट्रपति भवन – एडविन लुटियंस द्वारा डिजाइन किया गया दिल्ली का एक प्रसिद्ध स्मारक है राष्ट्रपति भवन, जिसमें भारत के तत्कालीन वाइसराय रहा करते थे और अब भारत के राष्ट्रपति रहते हैं। 1911 में इस भवन का निर्माण शुरू हुआ और इसे पूरा होने में करीब 19 साल लग गए। इस भवन के पश्चिमी हिस्से में मौजूद मुग़ल गार्डन काफी प्रसिद्ध है, जिसे हर साल बसंत में आम लोगों के लिए खोला जाता है।
लाल किला – लाल पत्थर से बना दिल्ली का लाल किला पारसी, यूरोपीय और भारतीय स्थापत्य कला का मेल होने के कारण अपनेआप में अनूठा है। शाहजहां ने 1638 में ये किला बनवाया था जिसे बनने में 10 साल का समय लगा।
जामा मस्जिद – पुरानी दिल्ली में स्थित एक प्रमुख मस्जिद है जामा मस्जिद । ये मस्जिद देश की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है और शाहजहां द्वारा बनवायी गयी कई इमारतों में से आखिरी आलिशान भवन भी है। इसका निर्माण 1644 में शुरू हुआ और 1658 में ये मस्जिद बनकर तैयार हुयी। लाल पत्थर और संगमरमर से बनी इस मस्जिद में तीन भव्य दरवाजे हैं।
जंतर-मंतर – जयपुर के शासक महाराजा जयसिंह द्वितीय द्वारा बनवायी गयी ऑब्जर्वेटरी में से एक दिल्ली में है। इसे 1725 में बनवाया गया था। इसमें मौजूद विशालकाय उपकरण खगोलीय गणनाओं में मददगार हुआ करते थे। यहाँ ऐसे कई उपकरण मौजूद हैं जो खगोलीय ब्रह्माण्ड से जुड़ी दिव्य गणनाओं और ग्रहणों के पूर्वानुमान लगाने में मदद करते थे। इसमें बड़ा सन डायल भी है जिसे प्रिंस ऑफ डायल कहा जाता है।
कुतुबमीनार – दुनिया की सबसे ऊँची, ईंटों से निर्मित मीनार कुतुबमीनार है। इसकी ऊँचाई 72.5 मीटर है। दिल्ली के पहले मुस्लिम शासक कुतुबुद्दीन ऐबक ने इसका निर्माण 1193 में करवाया था।
लोटस टेम्पल – अपने फूल जैसे आकार के कारण बहाई मंदिर को लोटस टेम्पल भी कहा जाता है। इसे ईरानी-कनाडाई वास्तुविज्ञ फरीबुक साहबा ने 1986 में डिजाइन किया था। इसमें 27 सफेद रंग की पंखुड़ियां है, जिनकी खूबसूरती इस मंदिर को दिल्ली के प्रमुख आकर्षणों में से एक बनाती हैं।
राजघाट – यमुना नदी के पश्चिमी किनारे पर स्थित राजघाट एक पवित्र स्थान है जहाँ राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का स्मारक है। इस पर लिखे दो शब्द – ‘हे राम’ महात्मा गाँधी द्वारा बोले गए आखिरी दो शब्द थे। यहाँ का माहौल बेहद शांतिपूर्ण हैं। इस स्मारक के पास स्थित दो संग्रहालयों को महात्मा गाँधी को समर्पित किया गया है।
लोधी गार्डन – किसी दौर में ‘लेडी वेलिंगटन पार्क’ के नाम से जाना जाने वाला ये पार्क, बाद में लोधी गार्डन कहलाने लगा। इस गार्डन में मुबारक शाह, इब्राहिम लोधी और सिकंदर लोधी की मज़ारें हैं।
इंडिया गेट –राजपथ पर स्थित इंडिया गेट, प्रथम विश्व युद्ध और अफगान युद्ध में मारे गए भारतीय सैनिकों की याद में बनाया गया था। उन शहीदों के नाम इस इमारत पर खुदे हुए हैं। इस गेट का डिजाइन भी एडविन लुटियंस ने बनाया था और 42 मीटर ऊँचे इस गेट को बनने में 10 साल लगे थे।
पुराना किला – पुराना किला एक आयताकार किला है। इसके मुख्य दरवाजे के अंदर एक छोटा-सा पुरातत्व संग्रहालय है। हर शाम यहाँ ‘साउंड एंड लाइट शो’ होता है।
चांदनी चौक – दिल्ली के सबसे व्यस्त और पुराने बाज़ारों में से एक है चांदनी चौक, जो दिल्ली के किसी पर्यटन स्थल से कम महत्व का नहीं है। एशिया के इस सबसे बड़े थोक बाजार को शाहजहां ने बनवाया था और ये बाजार लाल किले से जामा मस्जिद तक, पुराने शहर में फैला हुआ है।
दिल्ली हाट – इस पारम्परिक बाज़ार में खानपान, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक गतिविधियों का मिश्रण दिखाई देता हैं और जरुरत की सभी आधुनिक चीज़ें भी यहाँ मिलती हैं। भारतीय संस्कृति की एक अनूठी झलक इस बाजार में देखी जा सकती है।