शाहजहां

शाहजहां 5a मुगल शाहजहां थे शाहजहां अपनी न्याय प्रीता और वैभव विलास के कारण अपने काल में बड़े लोग भी रहे किंतु इतिहास में उनका नाम केवल इस करना नहीं लिया जाता शाहजहां का नाम एक ऐसे आशिक के तौर पर लिया जाता है। जिसमें अपनी बेगम मुमताज बेगम के लिए विश्व की सबसे खूबसूरत इमारत ताजमहल बनाने का यत्न किया सम्राट जहांगीर के मौत के बाद छोटी उम्र में ही उन्हें मुगल शासन में उत्तराधिकारी के रूप में चुन लिया गया था ।1627 में अपने पिता की मृत्यु होने के बाद वह गद्दी पर बैठे उनके शासनकाल को मुगल शासन का स्वर्ण युग और भारतीय सभ्यता का सबसे समृद्ध काल बुलाया गया।

  1658 में औरंगजेब ने शाहजहां को ताजमहल में शाही खजाने को खर्च करने के जुर्म में बंदी बना लिया था इसके बाद शाहजहां ने अपने जीवन के अंतिम 8 वर्ष आगरा के किले में एक बंदी के रूप में वितरित किए जहां उसे औरंगजेब पीने के लिए नपा तुला पानी एक फूटी हुई मटकी में भेजता था। जब तक शाहजहां जीवित रहे तब तक शाहजहां की बेटी जहांआरा ने जेल में रहकर उनकी तीमारदारी की शाहजहां को नजरबंद कर औरंगजेब ने अपने को भाषा घोषित करवाया कहा जाता है कि मरने से पहले शाहजहां ने अपने पुत्र औरंगजेब को एक चिट्ठी लिखी थी। इस पत्र के आखिरी पंक्तियों में शाहजहां ने लिखा था कि "ए पिरस टू अजब मुसलमानी फिरते जिंदा आप आसानी आफरीन बाद हिन्द्वान सत बार मैं दे हृदय मुर्दा राव दायमा" ।इसका अर्थ है कि पुत्र तू भी विचित्र मुसलमान है। जो अपने जीवित पिता को जल के लिए तरसा रहा है उन हिंदुओं को शत-शत नमन है जो अपने मृत पूर्वजों को भी पानी देते हैं इस पत्र के जवाब में औरंगजेब ने लिखा कि जिस स्याही से लिखा है उसी साइको पी लो और मर जाओ।

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