नियोजन की आवश्यकता और महत्व

हम कहां हैं और  हम कहां जाना चाहते हैं न्यूज इन इस अंतराल के बीच सेतु बंध है। नियोजन के बिना किसी उपक्रम की सफलता संदिग्ध है। जिस प्रकार बिना अस्त्र-शस्त्र के सैनिक बिना पतवार के नाविक बिना कलम के लेखक और बिना अध्ययन के अध्यापक अपना कार्य युक्ति संगत ढंग से नहीं कर सकता ठीक उसी प्रकार भी आना नियोजन के व्यवसाय उपक्रम के लिए सफलता की कामना नहीं कर सकता है।

वस्तुत: नियोजन अन्य सभी प्रतिबंधकीय कार्यौ अर्थात संगठन निर्देशन और नियंत्रण का मूल आधार है। नियोजन की आवश्यकता और इसकी महत्वता निम्नलिखित बिंदुओं से स्पष्ट है:-

  1. जो कंपनी योजना बनाती है वे मितव्ययिता की दृष्टि से उन कंपनियों की तुलना में अधिक सफलता अर्जित करती है जो योजना नहीं बनाती।
  2. नियोजन के माध्यम से उपक्रम अपने संभावित भविष्य पर स्पष्ट रूप से नियंत्रण रख सकता है।
  3. नियोजन किसी उपक्रम को समन्वित परिवेश में क्रियाकलाप करने हेतु बाध्य करता है।
  4. नियोजन अधिक महत्वपूर्ण मामलों पर संगठन का ध्यान केंद्रित करता है।
  5. नियोजन वास्तविकता को समझने और उसे स्वीकार करने हेतु संगठन को समर्थ बनाता है।
  6. नियोजन कठोर निर्णय लेने और नियंत्रण करने के लिए संगठन के सम्मुख आधार प्रस्तुत करता है।
  7. नियोजन सुविधाओं के बेहतर और संतुलित उपयोग का मार्ग प्रशस्त करता है। 
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