अत्यधिक कठोर कहे जाने वाले विदेशी मुद्रा नियमन कानून जो कि विदेशी विनियम अधिनियम 1973 (FERA-1973) था अब बीते दिनों की बात हो गयी है। 31 मई, 2002 से इस अधिनियम का अस्तित्व पूर्णतया समाप्त हो गया है तथा इसके तहत किसी के भी विरुद्ध मुकदमा अब प्रारंभ नही किया जा सकेगा।किन्तु फेरा के तहत लंबित मामलों की जांच तथा मुकदमे की कार्यावाही प्रारंभ करने के लिए सनसेट क्लाज़ के तहत 2 वर्ष का समय प्रवर्तन निदेशालय को प्रदान किया गया था।इस प्रावधान के चलते 31 मई ,2002 तक जिन मामलो में मुकदमे की कार्यवाही शूरु नही हो सकी,उन्हें समाप्त माना जायेगा।
विदेशी मुद्रा बाजार में लेन देन को उदार बनाने तथा देश मे विदेशी मुद्रा बाजार के समुचित एवं सुव्यवस्थित विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने वर्ष 2000 में 27 वर्ष पुराने वर्ष 1973 से प्रभावी विदेशी मुद्रा नियमन अधिनियम के स्थान पर 11 जून ,2000 से एक नया विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम 1999 फेमा विधेयक लागू कर दिया है। फेमा पूर्ववर्ती फेरा की तुलना में अति उदार अधिनियम है।कठोर प्रावधानों वाले फेरा को 1973 में उस समय लागू किया गया था ,जबकि देश मे विदेशी मुद्रा की बहुत कमी थी।नए फेमा कानून में सबसे बड़ा उदारीकरण यह किया गया है कि इसके उलंघनकरताओं को अब केवल मौद्रिक दंड ही भुगतान करना पड़ेगा।