सी आर फार्मूला एवं लियाकत अली देसाई पैक्ट

सी आर फार्मूला (जुलाई 1944) :-

भारत छोड़ो आंदोलन के बलपूर्वक दमन के बाद भारतीयों में आपसी समझ बूझ स्थापित करने हेतु स्वयं प्रयास किया, जिसके परिणामस्वरूप 10 जुलाई 1944 को सी आर फार्मूला अस्तित्व में आया। इसे प्रसिद्ध गांधीवादी चक्रवर्ती राजगोपालाचारी  ने तैयार किया। इसमे निम्नलिखित बातें की गई थी :-

  1. मुस्लिम लीग के द्वारा भारत की स्वतंत्रता की मांग का समर्थन किया जाए।
  2. स्वतंत्रता की प्राप्ति के पश्चात एक आयोग का गठन किया जाएगा , जो कि भारत के उत्तर पश्चिम व उत्तर पूर्व के मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में सीमांकन किया जाएगा । इसमे इस बात का जनमत संग्रह होगा कि वह पाकिस्तान में रहना चाहता है अथवा भारत में।
  3. विभाजन की स्थिति में रक्षा , व्यापार व संचार व्यवस्था पर दोनों मिल बैठकर समझौता करेंगे।

मुहम्मद अली जिन्ना ने इस फार्मूले को स्वीकारने से इनकार कर दिया। उसने कहा इसमे लुंज पुंज और भूसा जैसा पाकिस्तान दिया गया है। इसमें गाड़ी को घोड़े से पहले लगाया गया है दूसरे शब्दों में एक तरफ जहां कांग्रेस पहले आजादी चाहती थी, वही दुूसरी तरफ मुस्लिम लीग पहले विभाजन चाहती थी औऱ फिर आजादी ।

लियाकत अली देसाई पैक्ट (अप्रैल 1945) :-

कांग्रेस और मुस्लिम लीग को एक मंच पर लाने के राजगोपालाचारी के प्रयास विफल हो  जाने के बाद एक और प्रयास किया गया। भूलाभाई देसाई , जो कि केंद्रीय विधान परिषद में कांग्रेस के नेता थे , ने लियाकत अली , जो उस समय परिषद में मुस्लिम लीग के उपनेता थे , से अप्रैल 1945 में एक समझौता किया जिसे ही देसाई लियाकत अली पैक्ट कहकर पुकारा गया। इस समझौते के अंतर्गत केंद्र में एक अंतरिम सरकार का गठन किया जाना था जिसमे कांग्रेस व मुस्लिम लीग के बराबर बराबर सदस्य हो तथा जिसमे अल्पसंख्यको के प्रतिनिधि तथा कमांडर इन चीफ के कुछ सदस्य शामिल हो।  मुस्लिम लीग ने इसे भी मानने से इनकार कर दिया।

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