चंद्रगुप्त मौर्य (322 ई0 पू0 -298 ई0 पू0)

मौर्य साम्राज्य का संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य था । इसके सजन्मऔर जाति के बारे में विद्वानों में मतभेद है । शूद्र- ब्राह्मण ग्रंथ, मुद्राक्ष, विष्णु पुराण के टीकाकार श्रीधर स्वामी तथा ढुढिराज कि मुद्राराक्षस का टीका इसे करते हैं ।

पुराणों के अनुसार शिशुनाग वंश के बाद नंद राजा आनंद राजा होगा । इसके अनुसार चंद्रगुप्त मौर्य शुद्र था। विष्णु पुराण के टिकापुर श्रीधर स्वामी ने चंद्रगुप्त मौर्य को नंद की पत्नी "मीरा " उत्पन्न बताया मीरा से उत्पन्न होनेेे के कारण मौर्य कहलाए ।

मद्राराक्षस में चंद्रगुप्त को धननद का पुत्र बताया गया है तथा चंद्रगुप्त को वृषल कहा गया है कुछ विद्वानों इसका अर्थ शुद्र मानते हैं ।

जस्टिन ने चंद्रगुप्त कौन नकुल बताया है । परन्तु यह मान्य नहीं है ।

पारसीक- स्पुनर के मतानुसार चंद्रगुप्त मौर्य पारसीक था । 

क्षत्रिय- जैन एवं बौद्ध ग्रंथ ऐसा क्षत्रिय सिद्धध करते हैं । इसके अनुसार चंद्रगुप्त मोरिया छत्रिय वंश से संबंधित था । इस मत की पुष्टि अशोक के लौरिया नंदगढ़ स्तंभ के नीचे के भाग में  उत्कीर्ण मयूर की आकृति से भी हो जाती है । सर्वप्रथम गुनवेडेल (Grunwedel)  महोदय ने बताया था कि मयूर मौर्य का राजवंश चिन्ह तथा अधिकांश विद्वानों इसी मत को मानते है।

 

Posted on by