वेवेल योजना

यूरोप में दूसरा विश्व युद्ध 1945 के अप्रैल मई माह तक समाप्त हो चुका था, परंतु एशिया में उसके शीघ्र समाप्त होने की कोई संभावना नही दिख रही थी। अमेरिका के लिए जर्मनी से ज्यादा जापान की पराजय महत्वपूर्ण थी , जो अभी इंडोनेशिया, सिंगापुर जैसे दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्रो में अपना प्रभाव जमाये हुए था । जापान की पराजय के लिए भारतीयो का सहयोग जरूरी था और ये सहयोग उसे तब तक नही मिल सकता था, जब तक कि भारत के संदर्भ में ब्रिटिश सरकार के द्वारा कोई सकारात्मक कदम नही उठाया जाता।

     अक्टूबर1943 में लार्ड लिनलिथीगो केेेे स्थान पर वेवेल को भारत का नया वायसराय बनाया गया । वायसराय वेवेल ने अपनी भारत मे नियुक्ति के पूर्व       कहा था कि वेभारत के लिए अद्भुभुत सौगातों का     थैैैला लेकर आ रहे हैं। इस योजना में निम्नलिखित बातें कही गई :-

  1. ब्रिटिश सरकार को भारत में लक्ष्य उसे स्वशासन की ओर ले जाना है।
  2. वायसराय की कार्यकारिणी से उसे तथा प्रधान सेनापति को छोड़कर शेष सारे सदस्य भारतीय हो जाने थे। 
  3. भारतीयों में सवर्ण हिंदुओं तथा मुसलमानों को समान संख्या में शामिल किया जाना था।
  4. इसके अलावा इसमें सिक्खों , दलितों  एवं भारतीयों  ईसाइयो को भी समुचित स्थान देने का सुझाव था।
  5. परिषद युद्ध संचालन तथा प्रशासन के संचालन के साथ साथ ऐसे उपायो पर विचार करेगी, जिसमे की संविधान निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो सके।
  6. इसके अतिरिक्त सीमांत और कबायली मामलो को छोड़कर शेष विदेशी मामले भारतीय मंत्रियों के नियंत्रण में रहेंगे।

इस योजना पर विचार विमर्श करने के लिए लार्ड वेवेल के द्वारा 25 जून 1945 को शिमला में एक सर्वदलीय सम्मेलन का आयोजन किया जाना था। यद्यपि इस योजना में वायसराय की कार्यकारिणी में सवर्ण हिंदुओं एवं मुस्लिमो को समान संख्या में रखा जाना था, जिस पर कांग्रेस को आपत्ति हो सकती थी, तथापि कांग्रेस ने इस सम्मेलन में भाग लेना स्वीकार किया।

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