अक्टूबर 1943 में लार्ड लिनलिथगो की जगह लार्ड वैवेल भारत का वायसराय नियुक्त हुए ।शान्ति व्यवस्था बनाए रखने के लिए लार्ड वैवेल ने सर्वप्रथम भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्यों को रिहा कर दिया ।
मार्च 1945 में वायसराय लार्ड वैवेल ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल एवं भारत सचिव लार्ड एमरी से भारत मेेें विद्यमान गतिरोध के संबंध में विचार - विमर्श किया ।
14 जून, 1945 को लार्ड वैवेल ने भारतीय राजनीतिक गतिरोध को दूर करने के लिए एक योजना प्रस्तुत की, जिसे वैवेल योजना के नाम से जानते है ।वैवेल योजना की प्रमुख बातें इस प्रकार थी -
केन्द्र में एक नई कार्यकारी परिषद का गठन किया जाएगा ।परिषद में वायसराय तथा कमाण्डर इन चीफ को छोड़कर शेष सभी सदस्य भारतीय होंगे ।
प्रतिरक्षा को छोड़कर सभी विभाग भारतीयों को दिए जाएंगे
कार्यकारिणी परिषद में मुसलमानों की संख्या सवर्ण हिन्दूओ के बराबर होगी ।
कार्यकारिणी परिषद एक अंतरिम राष्ट्रीय सरकार के समान होगी ।वायसराय बिना कारण निषेधाधिकार का प्रयोग नहीं करेंगे ।
युद्ध समाप्त होने के बाद भारतीय स्वयं संविधान बनाएंगे ।
कार्यकारिणी पर विचार के लिए शिमला में एक सम्मेलन बुलाया जाएगा ।
वैवेल प्रस्ताव पर विचार- विमर्श हेतु शिमला में 25 जून, 1945 को शिमला सम्मेलन का आयोजन किया गया । शिमला सम्मेलन में कुल 21 भारतीय राजनीतिक ने भाग लिया था ।
शिमला सम्मेलन में कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व मौलाना अबुल कलाम आजाद तथा मुस्लिम लीग का नेतृत्व मुहम्मद अली जिन्ना ने किया था ।