भारत के विभिन्न अंचलों के लिए विजयादशमी एक सांस्कृतिक रितु है। जिसमें धर्म अध्यात्म सामाजिक जीवन और कलाएं सब समाहित हैं यह रितु निश्चय ही एक उमंग और उल्लास लाती है मौसम में हल्की ठंडक भर जाती है और विजयादशमी के आगमन के साथ वह आत्मीय गर्माहट भी जो हम सबकी जानी पहचानी है। आगम से याद आई कि बंगाल में जहां मैं बड़ा हुआ आग मनी शब्द का प्रचलन है आग मनी यानी मां दुर्गा के आगमन की सूचना वहां दुर्गा पूजा के पंडाल सजने लगते हैं कि आ रही है मां दुर्गा और उत्तर भारत में राम लीलाओं की आग बनी होती है। उत्तर भारत ही क्यों दक्षिण भारत का मैसूर का दशहरा बड़े महत्व माना जाता है देश-विदेश से वहां की विजयादशमी देखने के लिए पर्यटक पहुंचते हैं सभी अंचलों के बाजार भी जाते हैं ।
10 सिर वाले रावण और राम की न्याय की सत्य की विजय विजयादशमी के मूल में है और न्याय व सत्य की जीत संभव होती है यह भावना मानव चारों ओर भर जाती है एक नई ऊर्जा एक नई आशा का संचार करती हुई बुराई पर अच्छाई की जीत का इतना बड़ा आश्वासन एक बार फिर बन जाती है। विजयादशमी सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने लिखा है कि राम की शक्ति पूजा में जय हो, जय हो हे पुरुषोत्तम नवीन/ महाशक्ति राम में हुए लिंक।
देखो तो विजयादशमी में इस तरह राम और महाशक्ति एक आकार भी हो जाते हैं विजयादशमी और दुर्गा पूजा हर तरह से सचमुच ऊर्जा के शक्ति के प्रतीक हैं बंगाल में तो आदमी के साथ ही चंडी पाठ दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू हो जाता है।
अब तो गूगल पर यूट्यूब पर यह सारे पाठ उपलब्ध हैं विभिन्न संगीतकारों के रखे हुए जब हमने कहा कि विजयादशमी एक ऋतु है और उसमें धर्म अध्यात्म के साथ कलाएं भी समाहित हैं तो यही सोच कर कि इस ऋतु में हमें संगीत नाटक नृत्य मूर्ति शिल्प हस्तशिल्प सकते हैं। रामनगर की रामलीला की ओर ध्यान दे तो मानो पूरी काशी ही मैं हो जाती है वहां रामलीला का मंचन किसी एक ही मंच पर नहीं होता है। राम कथा के विभिन्न प्रसंग विभिन्न स्थलों पर अभिनीत होते हैं और नगर वासी उसमें दर्शक अभिनेता और उसे संपन्न कराने की विभिन्न भूमिकाओं में होते हैं।