न्याय की लड़ाई महिलाओं के लिए कितनी कठिन है इसके कई उदाहरण पिछले दिनों सामने आए हैं लेकिन यह लड़ाई जब बहादुरी और निष्ठा के साथ लड़ी जाती है तो उसके छोटी बड़ी जीत भी हासिल हो जाती है या अभी हमने इसलिए दिनों में देखा है शक्तिशाली पुरुषों के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाना बहुत मुश्किल होता है वह चाहे फिल्मों में हो और राजनीति में हो।
मीडिया में हो उनसे पंगा लेने पर अक्सर मृत महिलाओं को नौकरी के हाथ धोने या फिर खुद बेहूदा प्रचार का शिकार बनाया या तबादले कि आप कैसे से बाहर किए जाने के ख़तरे मॉल लेने पड़ते हैं। यही कारण है कि बहुत सारी महिलाएं अपने बचाव के रास्ते खुद तय करती हुई विपरीत परिस्थितियों में काम करती रहती हैं लेकिन पिछले दो हफ्तों में बहुत कुछ बदल गया मिस इंडिया रहे तनुश्री दत्ता के प्रख्यात कलाकार नाना पाटेकर के खिलाफ यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायत का खुलासा किया तनुश्री पर जहां की बौछार शुरू हो गई। वहीं उनके समर्थन में भी तमाम आवाज में उनकी इस बात की याद दिलाई गई कि उन्होंने घटना घटने के समय भी शिकायत की थी। लेकिन उनको धमकियों और हिंसात्मक हमलों के जरिए चुप करा दिया गया है घटनाक्रम के प्रत्यक्षदर्शियों ने भी उनकी बात की पुष्टि की उसके बाद तो जैसे बांध के दरवाजे खुल गए फिल्मों में ही नहीं मीडिया और राजनीति में बड़े नामों पर आरोप लगे और लोग सुनने लगे और उनके पीछे समर्थकों की फौज और उनके जैसे अनुभव से गुजरने वालों की फौज ने लगी नतीजे भी सामने आने लगे किसी निर्देशक से फिल्म वापस ले ली गई किसी अभिनेता के साथ काम करने से इंकार कर दिया गया।
किसी बड़े घराने के ऊंचे पद पर बैठे अधिकारी को हटा दिया गया इसी अखबार के पत्रकारों को पद से अलग कर दिया गया और फिर मंत्री को इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा और खोलने और उनका गंभीरता पूर्वक अध्ययन करने का आदेश दिया है इससे भी बड़ी खबर यह है कि साइन एंड टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन ने बयान दिया है कि उन्होंने भी फिल्म उद्योग में उनका अध्ययन कार्यवाही करने के लिए समिति गठित करने का फैसला ले लिया है।