पावना विद्रोह ( 1873 - 76 ई. )

प्रमुख नेता - ईसान चन्द्र राय, शम्भू पाल, केशव चन्द्र राय 

क्षेत्रा --- पावना  ( बंगाल )

पावना क्षेत्र बंगाल का प्रमुख पटसन  उत्पादक क्षेत्र है ।यहां के किसानों को  1850  ई. के अधिनियम  10  के अंतर्गत जमीन पर कब्जे का अधिकार तथा कुछ सीमा तक लगान में वृद्धि के लिए संरक्षण प्राप्त था ।

किन्तु जमींदारों ने लगान की दरें बढ़ा दी तथा किसानों के कब्जे के अधिकार के विरूद्ध बेदखली के लिए षडयंत्र रचने लगे ।

जमींदारों के अत्याचार के विरुद्ध  1873 ई.  में बंगाल के पावना जिले के यूसुफशाही में एक किसान संघ की स्थापना हुई ।इस संघ ने किसानों को संगठित करने लगान न देने तथा जमींदारों के विरुद्ध मुकदमों में खर्च के लिए चन्दा इकट्ठा करने का कार्य किया ।

पावना विद्रोह की प्रमुख विशेषता कानून के दायरे में रहकर  अहिंसक लड़ाई लड़ना था ।

किसानों की यह लड़ाई केवल जमींदारों के विरुद्ध थी ।आन्दोलनकारियो ने नारा दिया कि हम महारानी और सिर्फ महारानी की रैय्यत होना चाहते हैं ।किसानों ने ब्रिटिश शासन का विरोध नहीं किया ।

इस आन्दोलन की  एक  अन्य विशेषता थी कि हिन्दू  और मुसलमान का एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर  आन्दोलन करना ।अंग्रेेेेजो व जमींदारों ने इसे साम्प्रदायिक दंगे का नाम दिया,  क्योंकि अधिकतर जमींदार हिन्दू व काश्तकार मुसलमान थे ।

बंगाल के बुद्धिजीवी बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय,  आर. सी. दत्त  आनंद मोहन बोस, सुरेन्द्र बनर्जी  आदि ने पावना विद्रोह को अपना समर्थन दिया तथा किसानों की रक्षा हेतु अभियान चलाया ।

ईसान चन्द्र राय, केशव चन्द्र राय, शम्भूपाल पावना विद्रोह के प्रमुख नेता थे ।लेफ्टिनेंट गवर्नर कैंपबेल ने पावना आन्दोलन का समर्थन किया था ।

अंततः सरकार ने  1884 ई  में बंगाल काश्तकारी कानून बनाकर रिय्यतो को संरक्षण प्रदान किया ।

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