फड़के आन्दोलन ( 1879 ई. )

1879 ई. में महाराष्ट्र में किसानों के नेता के रूप में वासुदेव बलवंत फड़के का उदय हुआ ।जस्टिस राणाडे द्वारा धन निकासी पर दिया गया व्याख्यान तथा  1876- 77 ई. में पश्चिमी भारत में पड़े भयंकर  अकाल  और इसके परिणाम स्वरूप किसानों की शोचनीय दशा ने फड़के को आन्दोलन के लिए प्रेरित किया ।

फड़के ने महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले किसानों तथा रमोसी आदिवासियों के सहयोग से संगठन बनाया । इस संगठन के सहयोग से उन्होंने डकैतिया डाल कर धन  एकत्र करना, संचार व्यवस्था को तहस - नहस करना आदि को अपना लक्ष्य बनाया ।

फड़के के विद्रोह से स्पष्ट रूप से क्रांतिकारी आतंकवाद का पूर्वाभास मिलता है । इन्होंने हिन्दू राज्य की स्थापना का नारा भी दिया ।

बासुदेव बलवंत फड़के को   1880  में गिरफ्तार कर लिया गया तथा  1883 ई. में जेल में उनकी मृत्यु हो गई 

19 वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में हुए किसान आन्दोलनों का स्वरूप  1858  ई.  के बाद होने वाले किसान आन्दोलनों के मुख्य शाक्ति किसान ही थे ।इनका विरोध सीधे सरकार से नहीं था, अपितु  इनके विरोध के केंद्र थे जमींदार साहूकार तथा महाजन ।

इस समय के किसान  आन्दोलन व्यापक बदलाव के लिए नहीं हुए, अपितु  उनका उद्देश्य यथास्थिति बनाये रखना था ।अधिकांश किसान  आन्दोलन का मुख्य कारण लगान में बढ़ोतरी  अपनी जमीन से बेदखली तथा साहूकारों एवं महाजनो द्वारा किया जाने वाला धोखाधड़ी था ।

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