संथाल विद्रोह ( 1855 - 1856 )

प्रमुख नेता -- बिरसा मुण्डा 

वर्तमान में संथाल जाति का केंद्र झारखंड राज्य में है ।परंतु पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ, बिहार तथा बांग्लादेश के एक बड़े भू - भाग में यह जनजाति रहती है ।

यह पूरा क्षेत्र बंगाल प्रेसीडेंसी के अंतर्गत शामिल था । राजमहल से भागलपुर तक का पूरा क्षेत्र ' दामन - ए - कोह ' नाम से जाना जाता था । जो कि संथाल विद्रोह का केंद्र था ।

1739 ई. में स्थापित स्थायी बन्दोबस्त व्यवस्था से संथालो की जमीने छीन ली गई तथा इस व्यवस्था ने जमींदारी प्रथा को जन्म दिये, जिससे संथालो का शोषण लगातार बढ़ता गया ।इस समय गैर आदिवासी  ( दिकू), जो आदिवासियो के क्षेत्र में प्रवेश कर  उनके साथ ज्यादतिया करते थे ।

भूमि कर  अधिकारियों द्वारा किये जाने वाले दुर्व्यवहार,  पुलिस के दमन,  जमींदारों एवं साहूकारों की वसूलियो के विरुद्ध संथाल लोगों ने विद्रोह किया ।इस विद्रोह को सीदू और कान्हू ने नेतृत्व प्रदान किया ।सीदू और कान्हू ने घोषणा की कि ठाकुर जी  ( भगवान ) ने उन्हें आदेश दिया है कि वे आजादी के लिए हथियार उठा लें ।

सरकार को संथाल विद्रोह को कुचलने के लिए मार्शल लॉ लगाना पड़ा तथा इनके नेताओं को पकड़ने के लिए दस हजार रुपये का  इनाम घोषित किया गया ।

संथाल विद्रोह को दबाने के लिए मेजर बारो के नेतृत्व में एक सेना भेजी गई जिसे संथालो ने हरा दिया था । अंततः भागलपुर के कमिश्नर ब्राउन  और मेजर जनरल लायड ने क्रूरतापूर्वक संथाल विद्रोह का दमन किया था 

अगस्त  1855 ई. में सीदू तथा फरवरी  1856 ई. में कान्हू को मार दिया गया ।

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