भारत की समुद्री सीमा का संक्षिप्त परिचय

  1. पश्चिमी समुद्र तटीय सीमा :- यह गुजरात कच्छ के सरक्रिक से प्रारम्भ होकर तमिलनाडु के कन्या कुमारी तक फैली है। पुनः यह सीमा चार उप विभागों में बंटी हुई है-
  • काठियावाड़ तटीय सीमा :- कच्छ रन के सरक्रीक से लेकर गुजरात के आखिरी बिंदु तक ।
  • कोंकण तट :- गुजरात से गोवा तक है।
  • कन्नड़ तट :- गोवा से कर्नाटक के मंगलौर तक ।
  • मालाबार तट :- मंगलौर से तमिलनाडु के कन्याकुमारी तक।

2. पूर्वी समुद्र तटीय सीमा :- यह बंगाल की खाड़ी के उत्तर में गंगा के मुहाने से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक फैला हुआ है। इस सीमा के तीन उप विभाग हैं -

  • उड़ीसा या उत्कल तट :- निचले गंगा मैदान से स्वर्ण रेखा नदी तक ।
  • उत्तरी सरकार तट।
  • कोरोमण्डल तट।

 दक्कन ट्रैप :-

दक्कन ट्रैप का निर्माण मेसोजोइक महाकल्प के क्रिटेशियस कल्प में हुआ। इस समय विदर्भ क्षेत्र में ज्वालामुखी के दरारी उदभेद से लावा का बृहद उदगार हुआ एवं लगभग 5 लाख वर्ग किमी का क्षेत्र इससे आच्छादित हो गया इस क्षेत्र में 600 से 1500 मीटर एवं कहीं कहीं तो 3,000 मी की मोटाई तक बेसाल्टिक लावा का जमाव मिलता है। यह प्रदेश दक्कन ट्रैप कहलाता है। दक्कन ट्रैप महाराष्ट्र के अधिकांश भाग, गुजरात और मध्यप्रदेश में फैला है। इसके अलावा कुछ टुकड़ो के रूप में तमिलनाडु, झारखंड एवं छत्तीसगढ़ में  फैला हुआ है।

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