सिंध विजय (1591ई०)

यद्यपि अकबर ने 1574 ई० में बक्सर जीत लिया था, किंतु दक्षिण सिंध का एक बड़ा भाग अभी भी अविजीत था। उस समय सिंध का शासक मिर्जा जानी बेग था ‌। अकबर के लिए सिंध विजय महत्वपूर्ण था क्योंकि इस पर अधिकार करने के पश्चात उसे कंधार विजय में सहायता मिलती । अतः अकबर ने 1590 ई० अब्दुरहीम में खान-खाना को मुल्तान का सूबेदार नियुक्त किया तथा उसे सिंध पर अधिकार करने का आदेश दिया । मिर्जा‌ जानी बेग ने पहले मुगलों का मुकाबला किया किंतु बाद में आत्मसमर्पण कर अकबर की अधीनता स्वीकार कर  किया। उसने अपने दो दुर्ग थट्टा व सेेहवान की सौप दिया । अकबर ने भी उसके साथ अच्छा व्यवहार किया । 3000 का मनसब प्रदान कर उसे शाही सेना में ले लिया । कुछ समय के लिए मिर्जा जानी बेग  दीन-ए-इलाही का सदस्य भी बन गया तथा अंत तक अकबर के प्रति वफादार बना रहा ।
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