यद्यपि अकबर ने 1574 ई० में बक्सर जीत लिया था, किंतु दक्षिण सिंध का एक बड़ा भाग अभी भी अविजीत था। उस समय सिंध का शासक मिर्जा जानी बेग था । अकबर के लिए सिंध विजय महत्वपूर्ण था क्योंकि इस पर अधिकार करने के पश्चात उसे कंधार विजय में सहायता मिलती । अतः अकबर ने 1590 ई० अब्दुरहीम में खान-खाना को मुल्तान का सूबेदार नियुक्त किया तथा उसे सिंध पर अधिकार करने का आदेश दिया । मिर्जा जानी बेग ने पहले मुगलों का मुकाबला किया किंतु बाद में आत्मसमर्पण कर अकबर की अधीनता स्वीकार कर किया। उसने अपने दो दुर्ग थट्टा व सेेहवान की सौप दिया । अकबर ने भी उसके साथ अच्छा व्यवहार किया । 3000 का मनसब प्रदान कर उसे शाही सेना में ले लिया । कुछ समय के लिए मिर्जा जानी बेग दीन-ए-इलाही का सदस्य भी बन गया तथा अंत तक अकबर के प्रति वफादार बना रहा ।