समन्वय प्रबंध का एवं संगठन का प्रथम सिद्धांत है। न्यूमैन अपनी कृति 'Administrative Action' में लिखते हैं कि "समन्वय कोई पृथक् क्रिया नहीं है, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था है जो प्रशासन के सभी चरणों में व्याप्त हो गई है" संगठन के अंदर के तनाव, कार्यों के दोहराव, परस्पर विरोधी नीतियों को दूर करने जैसे नकारात्मक कारणों से समन्वय की आवश्यकता पड़ती है कार्य के किसी एक पक्ष की ओर ध्यान देने एवं अन्य पहलुओं की और उपेक्षा की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करके सभी पक्षों को उद्देश्य की दृष्टि से समान महत्व देने के लिए भी समन्वय की आवश्यकता पड़ती है। इसी प्रकार किसी एक ही कई के साम्राज्य अधिकार विस्तार की प्रवृत्ति को भी इसी समन्वय के माध्यम से उत्साहित किया जा सकता है।
समन्वय का अर्थ होता है एक संगठन की क्रियाओं मे लाना, ताकि उसका कार्य सरल हो जाए और वह सफलता प्राप्त कर सकें। साधारण शब्दों में, समन्वय से तात्पर्य है संगठन के क्रिया-कलापों और गतिविधियों में उचित संबंध, समायोजन तथा तालमेल स्थापित किया करना।
टेरी महोदय के अनुसार, "जहां सहयोग किसी सामान्य लक्ष्य की प्राप्ति के लिए एक व्यक्ति का दूसरे व्यक्ति या दूसरे के साथ सामूहिक कार्य है, जबकि सामूहिक से अधिक है समन्वय"।
निग्रो के अनुसार, "समन्वय से तात्पर्य है कि संगठन के विभिन्न अंग एक साथ मिलकर प्रभावकारी रूप से कार्य करते हैं और काम संघर्ष, अतिआच्छादन या पुनरावृति के बिना चलता है।"
संक्षेप में, समन्वय का अर्थ ऐसी व्यवस्था करना है कि किसी संगठन के सभी हिस्से कार्य की पुनरावृति किए बिना निर्धारित लक्ष्यों की ओर कदम मिलाते हुए आगे बढ़े।